Tuesday, February 23, 2021

आज भी भारती को थियेटर करना बहुत पसंद है

 अभिनेत्री भारती आचरेकर के अभिनय ने हम सभी को बहुत प्रभावित किया है चाहे वो लोकप्रिय धारावाहिक  "सोन परी" की स्ट्रिक्ट स्कूल प्रिंसिपल की भूमिका हो या "वागले की दुनिया" की राधिका वागले की भूमिका हो या धारावाहिक "सुमित संभाल लेगा " की मॉडर्न सास डॉली की भूमिका हो या हास्य धारावाहिक "चिड़िया घर "  में बुआ का किरदार हो। वैसे तो सभी किरदारों में उन्होंने हमेशा ही दर्शकों का मनोरंजन किया है लेकिन दर्शक विशेष रूप से उनके हास्य अभिनय को बहुत पसंद करते हैं। 


१५ अक्टूबर १९५९ में जन्मीं भारती ने १७ साल की उम्र से ही अभिनय करना शुरू कर दिया था। उनकी माँ माणिक वर्मा एक प्रसिद्ध गायिका थी। अपनी गायकी के लिए उन्हें पदम् श्री  मिला था। जबकि पिताजी अमर वर्मा हिंदी --उर्दू के लेखक और  कवि थे। इनकी तीन बहनें और भी हैं एक बहन वंदना गुप्ते भी एक लोकप्रिय मराठी अभिनेत्री हैं।  दूसरी बहन रानी वर्मा भी एक गायिका हैं और तीसरी बहन हैं अरुणा जयप्रकाश। घर परिवार में संगीत - कला का माहौल था इसलिए इन्होने भी संगीत में ग्रेजुएशन किया।  हालाँकि भारती अच्छी गायिका हैं लेकिन इन्होंने अभिनय को अपना कॅरियर बनाया क्योंकि अभिनय में उनकी दिलचस्पी बहुत थी। इन्होने  मराठी और हिंदी रंगमंच के साथ - साथ अनेकों हिंदी - मराठी  फिल्मों और टी वी धारावाहिकों में अभिनय किया है।
९०  के दशक में कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण के लिखे उपन्यास पर आधारित एक शो "वागले की  दुनियाँ " का प्रसारण दूरदर्शन पर होता था।  इस शो में भारती ने श्री निवास वागले की पत्नी राधिका वागले की भूमिका अभिनीत की थी। उनकी इस भूमिका ने दर्शकों का मन  मोह लिया था आज भी कुछ दर्शक उनकी इसी भूमिका को याद करते हैं। जबकि बस १९ एपिसोड ही बने थे इस शो के, फिर भी यह शो बहुत लोकप्रिय  हुआ था। करीब  ३३ सालों के बाद एक बार फिर  यह शो "वागले की दुनियाँ - नई पीढ़ी नये किस्से " नये रंग रूप के साथ ८ फरवरी से सोनी सब  प्रसारित हो  रहा है। एक बार फिर से अपने उसी किरदार को अभिनीत कर बहुत ही खुश हैं भारती। उनका कहना है ," मैं बहुत ही खुश हूँ इस शो में काम करके। बहुत कम लोगों  को मौका मिलता है  किसी किरदार को दोबारा अभिनीत करने का। "
जहाँ तक हम भारती आचरेकर की हास्य अभिनय की बात करें तो उन्होंने हमेशा ही दर्शकों को हँसा - हँसा  कर लोट - पोट किया है। बड़े परदे पर तो उन्होंने अनेकों प्रकार की भूमिकायें अभिनीत की हैं लेकिन छोटे परदे पर उन्होंने ज्यादातर हास्य भूमिकायें ही अभिनीत की हैं। उन्होंने आ बैल मुझे मार , कच्ची धूप , वागले की दुनियाँ , चोर पड़ोसन ,श्रीमती शर्मा ना  कहती थीं , सोन परी ,तेरी भी चुप मेरी भी चुप , लापतागंज,मैं कब सास बनूगीं , क्या होगा निम्मो का ,चिड़िया घर , सुमित संभाल लेगा , सिया के राम आदि धारावाहिकों में अभिनय किया है।

फिल्मों की बात करें तो पिछले दिनों ओ टी टी पर रिलीज हुई निर्देशक डेविड धवन की फिल्म "कुली नंबर - १ " में दादी की भूमिका अभिनीत की थी।  उन्होने अपना फ़िल्मी सफर १९८०  में फिल्म "अपने पराये " से शुरू किया था। उनकी कुछ मुख्य फ़िल्में इस प्रकार हैं -- ब्रज भूमि ,संजोग , सुर संगम ,चमेली की शादी , ईश्वर ,बेटा , फिर भी दिल हैं हिन्दुस्तानी ,हाल ए दिल ,लिटिल जॉन ,जिंदगी खूबसूरत है , दिवसेन दिवस ( मराठी )फ्लेवर्स (अंग्रेजी ) 
सातच्या आत घरात (मराठी )सनाई चौघडे (मराठी ) वालू (मराठी ) अर्धांगी ( मराठी ) अगली और पगली ,आगे से राइट ,देसी बॉयज , रास्कल्स ,चश्मेबद्दूर , लंच बॉक्स ,पटेल की पंजाबी शादी और पोस्टर बॉयज आदि। 
रती ने १० साल तक टी वी चैनल्स की तरफ से प्रोड्यूसर का काम  भी किया  खुद भी कुछ धारावाहिकों का निर्माण किया लेकिन इसमें उन्हें कुछ विशेष सफलता नहीं मिली। अमिताभ बच्चन , रणबीर कपूर , आलिया भट्ट ,अक्षय कुमार , दीपिका पादुकोण, करीना कपूर की प्रशंसक भारती को अपने खाली समय में इन कलाकारों की फ़िल्में  देखना , घूमना , नाटक देखना और अपनी बहनों से मिलना  बहुत पसंद है।  थियेटर में भारती ने लगभग सभी बड़े कलाकारों के साथ काम किया है और वो आज भी अपने साथी कलाकारों को याद करती हैं।  टी वी  और फिल्मों के साथ - साथ आज भी भारती को थियेटर करना बहुत पसंद है।

पूजा इंटरटेनमेंट ने अपने मैग्नम ओपस ‘सूर्यपुत्र महावीर कर्ण’ के मनमोहक टाइटल लोगो का अनावरण किया!



 

महाभारत’ एक ऐसी महाकाव्यात्मक महागाथा हैजिसने पूरे विश्व में फिल्म बनाने वालों को प्रेरित किया है। हालांकिसेल्युलाइड पर ऐसी स्क्रिप्ट बहुत कम उतारी गई हैंजिनमें सूर्यपुत्र महावीर कर्ण के दृष्टिकोण से इस महाकाव्य की कथा कही गई हो। इस दृष्टिकोण से महाभारत-कथा को सबसे पहली बार फिल्म निर्माता वासु भगनानीदीपशिखा देशमुख और जैकी भगनानी बड़े परदे पर साकार करने जा रहे हैं।


तमाम बारीकियों पर अभूतपूर्व ध्यान देने के साथ-साथ नए कीर्तिमान स्थापित करने वाले विजुअल इफेक्ट्स के दम पर इस फिल्म की परिकल्पना अद्वितीय पैमाने पर की गई है। यह भारतीय सिनेमा में बड़े परदे पर उतारी गई किसी भी अन्य फिल्म से अलग एक कौतुक भरी चमत्कारी फिल्म होगी। इस मल्टीलिंगुअल प्रोजेक्ट का लेखन और निर्देशन आर एस विमल के द्वारा किया जा रहा है। यह फिल्म पूजा इंटरटेनमेंट का अब तक का सबसे विशिष्ट और विशाल प्रोडक्शन होगी।


फिल्म महाभारत की घटनाओं को सूर्यपुत्र महावीर कर्ण के दृष्टिकोण से हाईलाइट करेगी तथा यह 21वीं सदी के सबसे प्रतीक्षित बॉक्स-ऑफिस संग्रामों में से एक साबित होगी।


निर्माताओं ने भारत के प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास को फिल्म के संवाद, लिरिक्स  तथा अतिरिक्त स्क्रीनप्ले लिखने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह डॉ. विश्वास द्वारा भारत की किसी भी फिल्म के साथ की गई प्रथम सहभागिता होगी। डॉ. विश्वास आम तौर पर अपने पर्फॉर्मेंस के दौरान अपनी कविताएं पढ़ते हैं और हिंदीउर्दू तथा संस्कृत के प्रति अपना प्यार प्रदर्शित करते हैं।


सूर्यपुत्र महावीर कर्ण’ को हिंदीतमिलतेलुगुकन्नड़ और मलयालम में बनाया जाएगा। यह फिल्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के भव्य पीरियड ड्रामा वाले जॉनर की नई परिभाषा गढ़ने जा रही है। यह इस दशक की सबसे ज्यादा उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा की जाने वाली ब्लॉकबस्टर होने का वचन देती है।

Thursday, February 4, 2021

1962: द वॉर इन द हिल्स में माही गिल सशक्त भूमिका निभा रही हैं


~ सच्ची घटनाओं से प्रेरित सीरीज़ 1962: द वॉर इन द हिल्स 26 फरवरी, 2021 को केवल डिज़्नी+ हॉटस्टार वीआईपी और डिज़्नी+ हॉटस्टार प्रीमियम पर रिलीज़ होगी

 
अनेक बार यादगार प्रदर्शन करने के बाद, अभिनेत्री माही गिल आगामी सीरीज़ 1962: द वॉर इन द हिल्स में दिखाई देंगी। वो शगुन सिंह का किरदार निभा रही हैं, जो एक गौरवशाली सेना  पत्नी है। वो अपने सह कलाकार, अभय देओल के विपरीत आ रही हैं। इससे पहले ये दोनों युगल के रूप में देव-डी में दिखाई दिए थे। महेश मांजरेकर द्वारा निर्देशित इस सीरीज़ में सुमीत व्यास, आकाश थोसर एवं कई अन्य प्रभावशाली किरदार भी हैं, जिनकी घोषणा जल्द की जाएगी। हॉटस्टार स्पेशल्स सीरीज़ 1962: द वॉर इन द हिल्स सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और 3000 चीनी सैनिकों के खिलाफ 125 जवानों की हमारी सेना की बहादुरी एवं अदम्य साहस की कहानी सुनाती है।
 
इस सीरीज़ के बारे में अभिनेत्री माही गिल ने कहा, ‘‘1962: द वॉर इन द हिल्स मेरे लिए खास है। एक बार मैंने सेना के लिए आवेदन किया था और मेरा चयन भी हो गया था। और आज मुझे एक वॉर सीरीज़ में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला है। मैं एक सैनिक नहीं, बल्कि एक गौरवशाली सेना  पत्नी का किरदार निभा रही हूँ। मेरा मानना है कि जो परिवार  हर स्तर पर जवानों का सहयोग करते हैं, वो भी हमारे नायक हैं। मेरा किरदार शगुन एक आम सैन्य-पत्नी नहीं है, जो आम तौर पर मूवी या शो में दिखाई जाती है; वह मजबूत एवं दृढ़ है और अपने खुद के व्यक्तिगत युद्धों का सामना करती है।’’
 
सीरीज़ में माही गिल, शगुन सिंह का किरदार एक दृढ़ पत्नी और मां का है जो विपरीत से विपरीत स्थितियों में भी मजबूत बनकर खड़ी रहती है। हॉटस्टार स्पेशल्स प्रेज़ेंट्स 1962: द वॉर इन द हिल्स 26 फरवरी, 2021 को केवल डिज़्नी+ हॉटस्टार वीआईपी और डिज़्नी+ हॉटस्टार प्रीमियम पर रिलीज़ होगी।
 
देखिए 1962: द वॉर इन द हिल्स केवल डिज़्नी+ हॉटस्टार वीआईपी और डिज़्नी+ हॉटस्टार प्रीमियम पर

Thursday, January 28, 2021

लेस्बियन सम्बन्धो पर पहला वीडियो



कई सुपर गायकों का प्रबंधन करने वाले तरसेम मित्तल टी एम म्यूजिक के तहत देश का पहला ऐसा वीडियो गाना लेकर आये है जिसमें दो लड़कियों की मोहब्बत को दर्शाया गया है आमतौर पर इसे लेस्बियन सम्बन्ध कहते है लेकिन तरसेम का मानना है प्यार में शर्त कहाँ होती है । इस वीडियो के चर्चे हर तरफ हो रहे है। 


10 दिन में ही वीडियो को यूट्यूब पर करीब 7 लाख लोग देख चुके है। 7 लाख नंबर तब अधिक हो जाते है जब गायक और वीडियो की अभिनेत्रियां नई हो। खास बात है इस वीडियो को देखकर लोगो के विचार बहुत सकारात्मक है। 


स्वाभाविक बात है जब महिला समलेंगिग पर पहला वीडियो आया है तो विवाद भी होना ही है। तरसेम कहते है गायक अक्षय खोट का गाना पहले हमारे पास आया यह एक रोमांटिक गाना है रोमांटिक गानों पर रोज वीडियो बनते है तब हमनें सोचा कुछ तूफानी हो जाये और इस वीडियो का विचार बना । 


तरसेम बताते है समलैंगिग लड़कों पर पहला गाना 2014 में आ चुका है सेलिना जेटली का तर्रारम्पम पम ऐसे गीत गाया करो, लेकिन दो लड़कियों पर हमारा वीडियो पहला है। हालाँकि इससे पहले सोनम कपूर की फ़िल्म एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा आ चुकी है जिसमें दो लड़कियों की मोहब्बत है।


तरसेम का मानना है कोर्ट से आदेश आने के बाद भी जब तक हम यानि समाज ऐसी मोहब्बत को स्वीकृति नही देते तब तक बदलाव नही आयेगा। जैसा हमनें वीडियो में दिखाया है दोनो लड़कियां एक दूसरे को बहुत प्यार करती है घूमती है साथ मे रहती है लेकिन अन्त में क्या होता है वही जिसे अभी हमें स्वीकार करना है। 


आमतौर पर प्रचार वीडियो के आने से पहले होता है आप इतने दिनों बाद कर रहे है जवाब में तरसेम कहते है हमारा वीडियो गाना लीक से हटकर है हम लोगों की प्रतिक्रिया देखना चाहते थे अब जब हमारे वीडियो को लोग पसन्द कर रहे है जबकि हमारे वीडियो की दोनों अभिनेत्रियां मोमिता पाल और सोफिया नई है गायक अक्षय खोट का भी पहला गाना है उसके बाद भी यूट्यूब पर इतनी बड़ी सफलता ने हमें प्रेरित किया कि अब इसका प्रचार किया जाये।


वीडियो में दोनो लड़कियों के बीच किसिंग द्रश्य भी डाले गये है लड़कियों की मोहब्बत में यह जरूरी था प्रश्न के जवाब में तरसेम का कहना है आज ओटीटी के जमाने में किसिंग बहुत साधारण बात है।


विवाद की सुगबुगाहट होने लगी है इस पर तरसेम मित्तल का कहना है मैं कह चुका हूँ हमें सच को स्वीकार करना चाहिए समाज में बदलाव आने में समय लगता है हम तो यही चाहते है विवाद की जगह लोग समालोचना करे, सच को पसंद करें तभी हमारी और इस वीडियो की जीत होगी।





Sunday, January 10, 2021

अपनी स्टैंड अप कॉमेडी से दर्शकों को हँसा - हँसा कर लोट पोट कर देने वाले हास्य कलाकार ख्याली सहारण

करीब २२ देशों में अपनी स्टैंड अप कॉमेडी से दर्शकों को हँसा - हँसा कर लोट पोट कर देने वाले हास्य कलाकार ख्याली सहारण आज दर्शकों के चहेते कलाकार बन चुके हैं लेकिन एक समय वो भी था जब  भेड़ बकरी चरा कर ख्याली अपना गुज़ारा किया करते थे। यह लोकप्रियता ख्याली को यूँ ही हासिल नहीं हुई इसके  पीछे उनके कड़े संघर्ष की कहानी है।  राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के छोटे से गांव 18-सीपीडी में एक गरीब परिवार में जन्मे ख्याली ने अपनी जीविका कमाने के लिए बहुत छोटे - छोटे काम भी किये  हैं।  उन्होंने स्विमिंग पूल में काम किया। इसके अलावा  गंगा नगर के  गणेश सिनेमा में गेटकीपर का काम किया। साथ ही गंगानगर की चीनी मिल में वॉच मैन का काम भी किया, वहाँ ही  काम करते समय उनका एक हाथ मशीन में चला गया और बुरी तरह कुचला गया। एक हाथ से अपाहिज होने के बाद भी ख्याली ने हिम्मत नहीं हारी और उसने प्रण किया कि भीख मांगने से अच्छा तो वो कॉमेडी के क्षेत्र में ही काम करे और लोगों को हँसायें।  

  दुनियाँ में अपना नाम कमाने वाले ख्याली को बचपन से ही लोगों को हँसाना बहुत पसंद था। वो अपने स्कूल के होने वाले समारोहों में हिस्सा लेते थे और अपने चुटकुलों से सभी को हंसाते थे। उनके दोस्त और आस - पास के लोग भी उनकी इस प्रतिभा को बढ़ावा देते थे। शायद हास्य प्रतिभा उनके अंदर कुदरती ही थी तभी बड़े होने पर वो पूरे देश में अपने हास्य के लिए प्रसिद्द हुए। १० कक्षा तक पढ़ाई करने वाले ख्याली ने मिल के अपने हादसे के बाद  श्रीगंगानगर में ही गजल गायक जगजीत सिंह की राष्ट्रीय कला मंदिर अकादमी भी ज्वाइन कर ली। वहीं पर इन्होंने थियेटर और कॉमेडी का कोर्स किया। जहाँ उनकी प्रतिभा को निखरने का और भी मौका मिला। सन २००० में ख्याली चंडीगढ़ के सृष्टि थियेटर से जुड़ गये। यहाँ उन्होंने छात्रों को अभिनय के गुण  सिखाये । यहीं रहते हुए ही उन्होंने एंकरिंग भी करनी शुरू कर दी। ख्याली ने लोकप्रिय पंजाबी गायक गुरदास मान , मीका सिंह और अन्य पंजाबी गायकों के साथ स्टेज पर एंकरिंग की। 

हरियाणवी संस्कृति से बेहद लगाव रखने वाले ख्याली को लाफ्टर चैलेंज का हिस्सा बनने का मौका कुछ इस तरह मिला। हुआ यूँ कि एक बार दिल्ली में गायक कुमार सानू का शो था लेकिन उस शो में कुमार सानू को किन्ही कारणों से देर गयी।  जब तक कुमार सानू आते आयोजकों ने  ख्याली को स्टेज यह कह कर सौंप दिया कि वो दर्शकों  को हँसाये  , उनका मनोरंजन करें।  वहीं शो में  स्टार वन चैनल की टीम भी थी। उन्होंने ख्याली की प्रतिभा देखकर उन्हें द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में हिस्सा लेने  मुंबई आने का निमंत्रण दिया। २००६ में ख्याली अपनी तकदीर आजमाने लिए मुंबई  आ गये। बस यहीं से उनकी किस्मत ने करवट बदली और उन्होंने इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज के सीजन - २ में  ख्याली ने हिस्सा लिया और बहुत आगे तक गये हालाँकि वो इस शो को जीते नहीं लेकिन उन्होंने शो के जजों और देश का दिल जीत लिया।  इस शो के बाद ख्याली ने सोनी के लोकप्रिय हास्य शो "कॉमेडी सर्कस" में हिस्सा लिया। यहाँ भी उन्होंने दर्शकों को खूब हँसाया। ख्याली ने सब टी वी के शो "कॉमेडी का किंग कौन "   और  कलर्स के हास्य शो " छोटे मियां बड़े मियाँ धाकड़" में भी हिस्सा लिया था। टी वी के साथ साथ ख्याली ने बड़े परदे पर भी काम  किया है।  उन्होंने २००७ में आयी फिल्म "मेरी पड़ोसन " में काम किया। इसी साल उनकी दूसरी फिल्म "जर्नी बॉम्बे टू  गोवा" आयी। यही नहीं उन्हें २००८ में   हास्य फिल्म "सिंह इज किंग " मिली। इस फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में ख्याली के ऊपर एक गाना "भूतनी "  के भी फिल्माया गया था। इसके बाद (२००९ ) भावनाओं को समझो , मुस्कुरा के  देख ज़रा ( २०१० ) मिलता है चांस बॉय चांस (२०११ )  इश्क़ विच : यू नेवर नो , मुख्तियार चड्ढा दिलजीत दोसांझ के साथ  (२०१५ ) जट्ट वर्सेज आइलेट्स   ,तेरी भाभी है पगले ( २०१८ ) १५ लाख कदो आऊगा  , हम बजा  देंगे (२०१९ ) आदि फ़िल्में आयीं। ख्याली ने  जैकी श्रॉफ के साथ नील, द पार्टी, जीयो लाइफ बिंदास और सनी देओल व कंगना राणावत  के साथ भी फिल्मों में अभिनय किया है।  एक पंजाबी फिल्म "मि. सिंह "में उनके काम को काफी सराहा गया था। 

ख्याली अपने बारें में बताते हैं कि ,"एक समय था जब मुझे  गेट कीपर की नौकरी के १००० - १५०० रूपये मिलते थे वहीं जब मैं टी वी के शो का हिस्सा बना तब उन्हें १ लाख रूपये मिलने लगे। तब भी मेरे व्यवहार में अपने लोगों के प्रति कभी भी बदलाव नहीं आया और नहीं कभी आयेगा।" अपनी जमीन से जुड़े ख्याली ने जो भी कमाया  उससे उन्होंने अपने दादा रावता राम के नाम पर ट्रस्ट बनाया। ट्रस्‍ट के तहत निजी सैनिक स्कूल स्‍थापित किया। यह पहला सैनिक स्‍कूल है। 16 एकड़ में चल रहे इस स्कूल में एनडीए, सीडीएस व सेना की परीक्षाओं की पढ़ाई कराई जा रही है। मकसद सिर्फ यह है कि जो दिक्कतें उन्‍हा‍ेंने झेली कोई और न झेले।

Tuesday, December 29, 2020

फिल्म "मि इंडिया " के कैलेंडर यानि सतीश कौशिक


 अभिनेता सतीश कौशिक को दर्शक आज भी सबसे ज्यादा फिल्म "मि इंडिया " के कैलेंडर के नाम से जानते हैं।  हालाँकि उन्होंने अनेकों फिल्मों में शानदार अभिनय किया है।  ६४ साल के इस अभिनेता ने फिल्मों , टी वी और थियेटर सभी जगह खूब काम किया है।  बतौर अभिनेता तो उन्होंने अपनी जगह बनाई ही है साथ में एक लेखक और निर्देशक के रूप में भी उन्होंने बहुत काम किया है। १९८९  में फिल्म "राम लखन " और १९९६  में फिल्म "साजन चले ससुराल " इन दो फिल्मों के लिए सतीश को सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिल चुका है। ७ जनवरी को ओ टी टी प्लेटफॉर्म और सिनेमा घरों ,दोनों जगह उनकी फिल्म "कागज " रिलीज़ होने वाली है।  एक लेखक , निर्देशक और एक अभिनेता , तीनों ही रूपों में सतीश इस फिल्म से जुड़े हुए हैं। 

  
१३ अप्रैल १९५६,महेंद्रगढ़ में जन्में सतीश ने  दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और यही से उन्हें नाटक देखने और उसमें अभिनय का रुझान हुआ। इसके लिये उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में दाखिला ले लिया। दिल्ली से ८०० रुपये लेकर मुंबई चले सतीश ने हिंदी फिल्मों में अपना एक अलग मुकाम बनाया है। सतीश कौशिक ने अपने कॅरियर की शुरुआत बतौर सहायक फिल्म "मासूम" से की । कैसे उन्हें निर्देशक शेखर कपूर के सहायक का  काम मिला। इसके बारें में उन्होंने एक रोचक किस्सा बताया कि , " स्व अभिनेता शम्मी कपूर जी का एक बॉय था। डबिंग स्टूडियो में कई बार मिलते हुए मेरी उससे दोस्ती हो गयी थी। उसने मुझे शेखर कपूर के बारें में बताया कि ,"शेखर को एक सहायक के जरूरत है। उसी ने मुझे शेखर कपूर का नंबर भी दिया। मैं शेखर से मिला भी अपने काम के लिए। लेकिन बाद में पता चला कि किसी राज कुमार संतोषी को उन्होंने अपने सहायक रख लिया है, मैं बहुत निराश हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद शेखर का मुझे फोन आया कि अगर तुम मेरे साथ काम करना चाहते हो,तो आ जाना। बस क्या था मैं शेखर कपूर से जुड़ गया।  उनके साथ मेरी पहली फिल्म थी "मासूम। " इसमें मैंने बतौर सहायक और एक अभिनेता दोनों रूपों में  काम किया।"     

जहाँ तक हम उनकी हास्य फिल्मों की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है क्लासिक फिल्म "जाने भी दो यारों"  (१९८३ ) का। इस फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया और इसके संवाद भी लिखे रंजीत कपूर के साथ मिलकर। इस फिल्म में वो भ्र्ष्ट कांट्रेक्टर के सहायक बने थे। इसके बाद उनकी फिल्म आयी "मिस्टर इंडिया " जिसने उनकी जिंदगी ही पूरी तरह से बदल दी। इस फिल्म के दो किरदार आज भी दर्शकों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं एक है मोंगैंबो का और दूसरा है कैलेंडर का। कैलेंडर बन कर पतले सतीश ने दर्शकों को बेहद लुभाया। इसके बाद आयी १९८९ की लोकप्रिय फिल्म "राम लखन। " निर्देशक सुभाष घई की इस मल्टी स्टारर फिल्म में वो अनुपम खेर के नौकर की भूमिका में थे।  नौकर बन कर भी सतीश ने दर्शकों को बहुत हँसाया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्म फेयर का अवार्ड भी मिला था। इसके बाद फिल्म "साजन चले ससुराल " ( १९९६ ) में उन्होंने मुतु स्वामी के किरदार में एक बार फिर दर्शकों का बहुत मनोरंजन किया और फिर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का अवार्ड हासिल किया। १९९७ में आयी फिल्म "दीवाना मस्ताना  " उन्होंने पप्पू पेजर बनकर दर्शकों को हँसाया। ये दोनों ही फ़िल्में निर्देशक डेविड धवन की हैं। सन २००२ में आयी डेविड धवन की फिल्म "हम किसी से कम नहीं" इस फिल्म में भी उन्होंने फिर पप्पू पेजर बनकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। फिल्म "बड़े मियाँ छोटे मियाँ ,परदेसी बाबू ,राजा जी, हसीना मान जायेगी , दुल्हन हम ले जायेगें , हद कर दी आपने , डू नॉट डिस्टर्ब , डबल धमाल , छलाँग आदि फिल्मों में हास्य अभिनय करके दर्शकों का आज तक मनोरंजन किया है सतीश कौशिक ने। 

 ऐसा नहीं है उन्होंने केवल हिंदी फ़िल्में की की । उन्होंने २००७ में  ब्रिटिश निर्देशक साराह गेवरॉन की फिल्म " ब्रिक लेन " में भी अभिनय किया है। इस फिल्म में उन्होंने चानू अहमद का किरदार अभिनीत किया था। अपने किरदार को सशक्त बनाने के लिये उन्होंने वर्क शॉप्स ली और साथ में अंग्रेजी की क्लासेज भी ली। एक  बांग्ला देसी लड़की की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म में उनके साथ तनिष्ठा चटर्जी भी थीं।  अच्छी भूमिका थी सतीश की लेकिन फिल्म सफल नहीं हुई। अपनी इस फिल्म के लिए सतीश को बहुत अफ़सोस है कि इस फिल्म को दर्शकों ने देखा तक नहीं। 

सतीश ने अभिनय ही नहीं किया बल्कि उन्होंने कुछ फिल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया। हालाँकि उनकी निर्देशित अधिकतर फ़िल्में असफल ही रही हैं। उनकी पहली निर्देशित फिल्म थी १९९३ की सबसे मँहगी और असफल फिल्म "रूप की रानी चोरों का राजा। " अनिल कपूर और श्री देवी की जोड़ी भी इस फिल्म को नहीं बचा पायी। इसके बाद आयी १९९५ में "प्रेम " संजय कपूर और तब्बू की पहली फिल्म। यह भी औंधे मुँह जा गिरी। १९९६ में आयी फिल्म " मिस्टर बेचारा " के निर्माता थे सतीश। यह फिल्म भी बेचारी ही साबित हुई। १९९९ में आयी "हम आपके दिल में रहते हैं " इसे भी कुछ ज्यादा सफलता  नहीं मिली। २००० में हमारा दिल आपके पास है ,२००१ में मुझे कुछ कहना है दोनों ही फ़िल्में सफल रहीं। २००२ में आयी "बधाई हो बधाई " भी असफल फिल्म रही। २००३ में आयी फिल्म " तेरे नाम " सलमान खान और भूमिका चावला की इस फिल्म ने सफलता के परचम लहरा दिये। वादा (२००५ ) शादी से पहले (२००६ ) कर्ज  (२००८ ) तेरे संग ( २००९ ) मिलेगें मिलेगें ( २०१० ) गैंग ऑफ़ घोस्ट (२०१० ) यह सभी फ़िल्में असफल रहीं। अब दर्शकों को उनकी आने वाली फिल्म "कागज़ " का इंतज़ार है।  इस फिल्म में अभिनेता पंकज त्रिपाठी मुख्य भूमिका में हैं। सुनने में यह भी आ रहा है कि सतीश लोकप्रिय फिल्म "तेरे नाम " का सीक्वेल भी बना रहे हैं। 
सतीश के परिवार में उनकी पत्नी शशि कौशिक और बेटी वंशिका कौशिक और बेटा शानू कौशिक हैं। 

Tuesday, December 15, 2020

टीकू तलसानिया को  शूटिंग , पैराग्लाइडिंग और फोटोग्राफ़ी का भी शौक है

 टी वी और फिल्मों में आने से पहले अभिनेता टीकू तलसानिया गुजराती थियेटर से जुड़े हुए थे। वहीँ उनके अभिनय से प्रभावित होकर निर्देशक कुंदन शाह ने उन्हें टी वी के लोकप्रिय हास्य धारावाहिक "ये जो है जिंदगी " ( १९८४ ) में काम करने का मौका दिया। इस धारावाहिक में अभिनय करके टीकू तो रातो रात दर्शकों में लोकप्रिय हुए ही साथ में उनका संवाद " ये क्या हो रहा है " भी बहुत लोकप्रिय हुआ। 




 ४० सालों से ज्यादा अभिनय से जुड़े  टीकू के घर में जहाँ अधिकतर डॉ ही हैं वहीं टीकू की दिलचस्पी अभिनय की ओर थी। बचपन से ही वो अभिनेता बनना चाहते थे , वो स्कूल में होने वाले नाटकों में हिस्सा लेते रहते थे। बाद में वो प्रवीण जोशी के थियेटर ग्रुप से जुड़ गये। टीकू पूरी तरह से अभिनय के रंग में रंग चुके थे जबकि उनके पिता चाहते थे कि वो डॉ ही बने लेकिन उनकी माँ का उन्हें पूरा सपोर्ट था। इस बारे में टीकू का कहना है कि , "  जब मैंने अभिनय करने का सोचा उस समय फिल्मों में काम करने वाले को सम्मान से नहीं देखा जाता था। यह वजह थी कि पापा नहीं चाहते थे कि मैं इस क्षेत्र में जाऊँ। "

टीकू ने निर्देशक कुंदन शाह के साथ टी वी में ही नहीं बल्कि फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने उनके साथ लोकप्रिय हास्य फिल्म "जाने भी दो यारों " के अलावा कभी हाँ कभी ना , क्या कहना और दिल है तुम्हारा आदि फिल्मों में भी काम किया। जब कभी उन्हें टी वी और फिल्मों से फुरसत मिलती है तो वो अमेरिका और यूरोप के कई नाटकों में भी हिस्सा लेते हैं।  साथ ही टीकू खुद को एक ट्रेवलर मानते हैं। अपने खाली वक्त में वो अपनी बाइक से अलग - अलग शहरों की यात्रायें भी कर चुके हैं। बाइक से वो लद्दाख भी जा चुके हैं। इसके अलावा उन्हें शूटिंग , पैराग्लाइडिंग और फोटोग्राफ़ी का भी शौक है। 
 
टीकू का जन्म ७ जून १९५४ को मुंबई  में हुआ। उन्होंने मुंबई विश्व विद्यालय से स्नातक  पढ़ाई की है। दिल्ली के बारें में बात करते हुए ,"टीकू कहते हैं कि उन्हें दिल्ली के छोले - भटूरे  और कबाब बहुत पसंद हैं लेकिन यहाँ गर्मी बहुत पड़ती है। मैंने यहां मई के महीने में भी शूटिंग की है।  ऐसी भरी गर्मी में काम का अनुभव आज भी मुझे याद है।"   

सही मायने में फिल्मों में टीकू के अभिनय की शुरुआत १९८६ में निर्देशक राजीव मेहरा की फिल्म "प्यार के दो पल " से हुई थी। इस फिल्म के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक करके वो अनेकों फिल्मों में काम करते गये और अपने हास्य अभिनय से दर्शकों को हँसाते गये। यूँ तो टीकू ने २०० फिल्मों में काम किया है।लेकिन उनकी कुछ फ़िल्में ऐसी हैं जिन्हें आज भी दर्शक बार - बार देखना पसंद करते हैं इन सभी फिल्मों में उनका अभिनय भी लाजवाब था। दिल है कि मानता नहीं , कभी हाँ कभी ना ,अंदाज़ अपना अपना , दरार ,राजा , बोल राधा बोल ,मिस्टर बेचारा  ,राजा हिन्दुस्तानी ,इश्क़ , जुड़वाँ ,हीरो नंबर १ , डुप्लीकेट ,प्यार तो होना ही था , जल्लाद , सुहाग ,फिर हेरा फेरी , हँगामा , धमाल ,ढोल , पार्टनर ,वन्स अपॉन ए टाइम मुंबई दोबारा ,स्पेशल २६  आदि फिल्मों में तो उन्होंने दर्शकों को हँसाया लेकिन संजय लीला भंसाली की फिल्म "देवदास " में उन्होंने धर्मदास का किरदार अभिनीत करके दर्शकों को अचम्भित कर दिया।

फिल्मों में तो उन्होंने सभी तरह का अभिनय किया लेकिन टी वी पर उन्होने विशेष रूप से हास्य अभिनय ही किया। उन्होंने १९८४ में सबसे पहले कुंदन शाह के साथ काम किया "ये जो है जिंदगी " में।  दूरदर्शन पर प्रसारित इस धारावाहिक के जरिये उन्होंने देश के सभी दर्शको के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाई। इसके बाद श्रीकांत ( १९८७ ) दुनिया गज़ब की (१९९२  ) आनंद (१९९३  ) कभी ये कभी वो (१९९४ --९५ ) जमाना बदल गया , एक से बढ़कर एक ( १९९५ ) माल है तो ताल है (२०००  ) हम सब बाराती ( २००४ ) सजन रे झूठ मत बोलो (२००९ -११ ) ये चंदा कानून है ( २००९ ) गोलमाल है भाई सब गोलमाल है ( २०१२) प्रीतम प्यारे और वो ( २०१४ ) सजन रे फिर झूठ मत बोलो ( २०१७ ) आदि धारावाहिको में अभिनय किया है।  



टीकू ने थियेटर की अपनी को-आर्टिस्ट दीप्ति से शादी की । उनके दो बच्चे हैं रोहन और शिखा तलसानिया। शिखा भी एक्टर हैं उनकी कई फीचर फ़िल्में, शॉर्ट फिल्में हुए वेब सीरीज आ चुकी हैं। 

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