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Thursday, April 7, 2016

शरमन जोशी ने मुकुल कुमार की लिखी पुस्तक ऐज़ बॉय बिकम मैन मुंबई के क्रॉसवर्ड में रिलीज़ की


मुकुल कुमार जो इंडियन रेलवे के सीनियर अफसर हैं, इन्होने अपनी किताब लिखी है ऐज़ बॉय बिकम मेन  जिसे रिलीज़ करने शरमन जोशी आये। इस इवेंट में ब्राईट के योगेश लखानी और रेलवे के सत्य प्रकाश भी आये। बाद में मुकुल कुमार ने मीडिया और मेहमानों को बुक की कहानी के बारे में बताया। इस बुक को रूपा पब्लिकेशन्स ने मार्केट में लाया है। 

Sunday, January 10, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैन आचार्य रत्नसुंदरजी महाराज की ३०० वी क़िताब मेरा भारत महान भारत वीडियो लिंक से रिलीज़ किया


आचार्य रत्नसुंदरजी महाराज द्वारा लिखी ३०० वी क़िताब मेरा भारत महान भारत चार भाषा में है -हिंदी, इंग्लिश, मराठी और गुजरती। इस किताब को रिलीज़ किया गया सायन के सोमैया ग्राउंड पे जहाँ ३०,००० से ज़्यादा लोग आये थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस किताब को वीडियो लिंक से किया। उन्होंने कहा ३०० किताब लिखना कोई आसान काम नहीं है। मैं भले ही दूर हूँ पर मैं आपके साथ हूँ। मोदी जी ने इस किताब के बारे में कई बार ट्वीट भी किया है। 

आचार्य रत्नसुंदरजी महाराज ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया बुक रिलीज़ करने के लिए।

इस दस दिन से चल रहे इवेंट में कई मंत्री और बिजनेसमैन आये। आज मुख्य मंत्री देवेन्द्र फड़नवीस की पत्नी अमृता फड़नवीस और बी जे पी  मुंबई प्रेसिडेंट, आशीष शेलार की पत्नी प्रतिभा शेलार भी जैन गुरु का आशीर्वाद लेने आये।

Saturday, January 9, 2016

आचार्य रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज सुरीजी का आर्शीवाद लेने के लिए दिवाकर रावते,अजय चौधरी,गीता जैन और हर्षवर्धन पाटील साहित्य सत्कार समारोह,यात्रा ३०० सायन स्थित सोमैया ग्राऊन्ड पर आए.

    

 आचार्य रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज सुरीजी का आर्शीवाद लेने के लिए दिवाकर रावते, अजय चौधरी, गीता जैन और हर्षवर्धन पाटील साहित्य सत्कार समारोह, यात्रा ३०० सायन स्थित सोमैया ग्राऊन्ड पर आए। आज साहित्य सत्कार समारोह का आठवा दिन था और आज के दिन वूमन डे मनाया गया। इस अवसर पर ५० हजार महिलाएं आचार्य जी का आर्शीवाद लेने के लिए आई थी। यह नजरा देखने के लायक था।
 रिश्तों की अदालत के कार्यक्रम में निर्णायक स्थान पर विराजमान जैनाचार्य परमपूज्य रत्नसुंदरसूरीश्वरजी ने परिवारव्यवस्था की नीवं को सृदृढ़ बनाने के सटीक उपाय बताते हुए कहा कि तीन चीजों को संभालकर संपत्ति के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए – १. शारीरिक स्वस्थता २. मन की प्रसन्नता ३. परिवार का प्रेम। आचार्यश्री ने बताया कि बेटे को इतना लायक मत बनाइए कि वह आपको नालायक समझने लगे।
 दोपहर में फाइव स्टार ऑफ वूमन हार्ट विषय पर 6०,००० से अधिक महिलाओं के महासागर को संबोधित करते हुए कहा कि स्त्री को डब्ल्यू से वॉटर (water) जैसा समर्पणभाव आत्मसात करने चाहिए। ओ से आइन्टमेन्ट (Ointment) जैसा अर्थात दिल की घावों पर मलहम लगाने का काम करना चाहिए। एम से मीरर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। ए से अलार्रम (Alarm) कोई परिवारजन गलत मार्ग पर जाए तो रोकना चाहिए और एन से निडल (Niddle) सबको जोड़ने का काम करना चाहिए तभी आपका स्त्रीत्व सफल होगा।
 परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने कहा कि आचार्य जी के दर्शन से मन प्रसन्न हुआ है। आज महिला दिवस पर इतनी भारी मात्रा में महिलाओं का आचार्य जी के दर्शन के लिए आने से मुंबईवासियों का उत्साह नजर आता है। रिश्ते कैसे होने चाहिए? इस बारे में आचार्य जी ने बहुत ही सरल शब्दों में बताया है। भारत देश साधु-संतों और महात्माओं का देश है।
 अजय चौधरी ने बताया कि आचार्य जी का आर्शीवाद पाकर जीवन धन्य हो गया है। इस साहित्य सत्कार समारोह में युवा और महिला वर्ग को खास करके मार्गदर्शन किया गया है। यही सबसे बड़ा समाजसेवा है।
 गीता जैन (मेयर, मीरा-भाईंदर) ने कहा कि यह बहुत ही अच्छा आयोजन किया है, जिससे सही अर्थों में समाज की सेवा हुई है। समाज के लिए यह अच्छा कार्य हुआ है। आचार्य जी के वाणी का लाभ सबको मिला है। उनका आर्शीवाद और ज्ञान हमेशा मिलता रहेगा, उनके पास ज्ञान का अनमोल भंडार है। जिससे हर किसीका जीवन जरुर बदलेगा, क्योंकि उनकी वाणी में वह मिठास है।
 हर्षवर्धन पाटील (सायन्स एंड हेल्थ मंत्री) ने बताया कि यह अदभूत साहित्य सत्कार समारोह है, जिसमें सात्विक और सकारात्मक उर्जा मिलती है। महिला दिन मनाया गया है और इस त्यौहार में भारी तादाद महिलाओं का प्रतिसाद देखने को मिला है। आज के आधुनिक जीवन में आचार्य जी की वाणी का जरुर समाज पर सकारात्मक असर होगा। मुंबई की धरती पर इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन होने की वजह से इसका फायदा निश्चित रुप से मुंबईवासियों को होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।

आचार्य रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज सुरीजी का आर्शीवाद लेने के लिए मुरारी बापू, अभिनेता रजनिश दुग्गल, गायिका स्वाती शर्मा, निर्देशक राजीव रुईया और प्रदिप शर्मा साहित्य सत्कार समारोह, यात्रा ३०० सायन स्थित सोमैया ग्राऊन्ड पर आये

सरस्वती प्रसाद, प्रभावक प्रवचनकार प.पू. रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज साहेब ने यात्रा ३०० में आज श्रुत उपासना महोत्सव में प्रवचन देते हुए कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में विज्ञान ने Information और knowledge के बारे में बहुत बताया पर wisdom में पीछे ही रहा है। हमने संसार में ऋण कम किया इसलिए संसार बढ़ा नहीं है बल्कि पाप ज्यादा किए हैं इसलिए संसार की वृद्धि हुई है।
 महाराज साहेब ने बताया कि हम व्यसनमुक्त, पापमुक्त एवं प्रसादयुक्त बने। पाप दो प्रकार के हैं – कई पाप ऐसे हैं, जिनके पीछे हम पड़े हैं जैसे – हॉटल जाना, क्लब जाना वगैरह और कई पाप ऐसे है जो हमारे पीछे पड़े है – जैसे नारी को रसोईघर में कई पाप मजबूरन करने पड़ते है।
महाराज साहेब को एक पोस्ट कार्ड लिखना भी मुश्किल था उन्होंने ३००-३०० पुस्तकों पर अनेक विषयों पर विवेचन किया। गुरु के प्रति समर्पण भाव का यह जीता-जागता उदाहरण है।
 पूज्यश्री ने बताया कि काटा, घाव और छोटी-सी चिंगारी को कभी छोटा मत समझना क्योंकि वह भयंकर स्वरुप हो सकती है इसी प्रकार किसी भी पाप को छोटा मत समझना।
 शुद्धि और मुक्ति दिलाए वह ज्ञान है। चट्टान से पत्थर निकले वह product value (cost), पत्थर से प्रतिमा बने वह market value (price) है, लेकिन प्रतिमा से से शुभ भाव की उत्पति होना value है।
 महाराज साहेब ने बताया कि मैं तो केवल कुरियर हूं। भगवान के वचनों की डिलीवरी करता हूं। जो सत्कार्य करता है उनकी अनुमोदना न करे तो भी सम्ययदर्शन को क्षति पहुंचती है।
आज प्रवचनसभा में मुरारीजी बापू आए थे। उन्होंने भी अपनी सरल शैली में श्रुत को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि महाराजसाहेब मैं भी आपकी सारी पुस्तकें पढ़ता हूं और जो मेरे दिल को बातें छु जाती है वह मेरी कथा में जनता को बताता हूं।
 मुरारी बापू ने रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज साहेब के साथ बांद्रायणी का नाता जोडते हुए कहा कि इन दस दिनों में धर्म का महान कार्य हुआ है। मुझे बड़ी खुशी हुई है। प्रेम व भाव था इसलिए मैंने आज मौन व्रत तोड़ दिया है। ३०० वें पुस्तक के लिए मैं मेरी प्रसन्नता व्यक्त करता हूं। मुंबई नगरी में लोग इतने व्यस्त होने के बावजूद भारी मात्रा लोगों ने इसका लाभ उठाया है। मैं भी गृहस्थ जीवन जी रहा हूं, इसलिए मैं अपने आपको छोटा साधू मानता हूं। किसी भी वेष में अथवा भाषा में दर्शन करने और धर्मलाभ के लिए आया हूं। सम्यक विचारों में जीना चाहिए। साधू को शाल की जगह मशाल भेट देनी चाहिए, क्योंकि उस मशाल की ज्वलंत ज्योति से समाज को जगाने का महान धर्म का कार्य संपन्न हो सकता है। भरोसा ही भजन है, ऐसा मेरा व्यक्तिगत मानना है। विवेक में जीना चाहिए और समाज में विवेक जागरूक करना चाहिए। विचारों में जीए और विश्वास में जीए। रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज साहेब ने ३०० पुस्तके लिखने का बड़ा ही अच्छा कार्य किया है।
 अभिनेता रजनिश दुग्गल ने बताया कि साहित्य सत्कार समारोह में युवा पिढी के लिए ऊर्जा प्रदान करने का कार्य सपंन्न हुआ है और इस समारोह में आकर बहुत ही अच्छा लगा है।
 गायिका स्वाती शर्मा ने कहा कि मैं अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझती हूं कि इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य में मुझे आने का अवसर मिला है। मुझे बहुत ही खुशी हुई है।

Saturday, December 26, 2015

साहित्य सत्कार समारोह में आचार्य विजय रत्नसुंदरसूरीश्वरजी द्वारा लिखित ३०० वीं पुस्तक का लोकार्पण समारोह



साहित्य सत्कार समारोह में आचार्य विजय रत्नसुंदरसूरीश्वरजी द्वारा लिखित ३०० वीं पुस्तक 'मारूं भारत, सारूं भारत' का लोकार्पण समारोह १० जनवरी, २०१६ को मुंबई के सायन स्थित सोमैया ग्राऊन्ड पर होगा। परम पूज्य आचार्य विजय रत्नसुंदरसूरीश्वरजी को किसी परिचय की जरुरत नहीं है। यह हीरे-मोती जैसे मनमोहक व मानवता की सुंदरता और आकर्षणशीलता के रुप में भारत देश के महान जैन संत है। साथ ही उन्होंने अब तक विदेशों की यात्रा नहीं की है, तो भी उनके विचार और अनुयाई पूरी दुनिया में है, जिसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है।

वाणी की प्रभावकता, साहित्य की सृजनात्मकता एवं प्रकृति की सरलताका त्रिवेणी संगम अर्थात राष्ट्रहितचिंतक, पूज्यपाद, जैनाचार्य श्रीमद्विजय रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज का मूल नाम रजनी था, जिनका जन्म ५ जनवरी १९४८ में गुजरात के देपला नामक गांव में हुआ। पिता दलीचंदभाई तथा माता चंपाबेन के सुसंस्कारों के फलस्वरुप पुत्र रजनी १९ वर्ष की युवावय में पिता के साथ जैन दीक्षा स्वीकार करके मुनि रत्नसुंदरविजय बने। तब से लेकर आज तक तकरीबन ४५ वर्ष के सुदीर्घ संयमपर्याय में अपनी वाणी व लेखनों से आचार्यश्री ने लाखों लोगों के मन-जीवन तथा परिवार में शील-सदाचार-सौहार्द व श्रद्धा की प्रतिष्ठा की है। केवल जैन समाज ही नहीं, संपूर्ण राष्ट्र के जनहित को सुरक्षित करने के सद्-उद्देश्य से आचार्यश्री आज तक २९९ पुस्तकों का सृजन कर चुके हैं जिनमें से कई पुस्तकें ९ भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं। कम्प्यूटर-इंटरनेट के आधुनिक युग में भी आचार्यश्री के साहित्य को पाठकों का सुंदर प्रतिसाद प्राप्त हुआ है। उनकों सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' से सम्मानित किया गया है। इनके कई पुस्तकों को अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, सिंधी, उर्दू, फ्रेंच आदि भाषाओं में अनुवादित किया गया है और पूरे देश भर में ६ मिलियन से अधिक पुस्तकें वितरीत की गई है। उनके शब्दों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अरिहंत टीवी, पारस टीवी और सोहम टीवी के माध्यमों से सुना जा रहा है। कई लोगों को उनके भाषण के माध्यम से जीवन में लाभ हुआ है।

चार साल तक आचार्यश्री दिल्ली में थे और तब उनकी मुलाकात सत्तारुढ़ और कई अन्य पार्टीयों के नेताओं से हुई और उन्होंने शांती का संदेश फैलाने के साथ राष्ट्र और समाज की भलाई के लिए दिशा दिखाई है। गुरु महाराज के अनुसार, लोग फरक महसूस करते है, जब उन्हें सही दिशा और सही मार्ग दिखाया जाए। 

साहित्य सत्कार समारोह के कई अनोखे आकर्षण है और यह समारोह १ जनवरी से १० जनवरी, २०१६ तक होगा। इन १० दिनों के कार्यक्रम में अनेक प्रकार के उपक्रमों का आयोजन किया जाएगा। फिल्म झोन – जीवन यात्रा, फ्लाय झोन – साहित्य यात्रा, फन झोन – आनंद यात्रा, फ्लेम झोन – परिवर्तन यात्रा जैसे कई यात्राओं का दर्शन इस समारोह में होने वाला है। रजवाड़ी नक्शीकाम की उत्तम कला को जीवित करने वाला, ४०० फीट लंबा और ६० फीट ऊंचा भव्यातिभव्य प्रवेशद्वार है, जिसमें शंखेश्वर तीर्थस्थान है। विशाल प्रवचन मंडप, मां सरस्वती मंदिर, साधु-साध्वीजी की कुटिर और सभी अतिथियों की भोजन व्यवस्था अत्यंत सुचारु रुप से इस विशाल भोजन मंडप में की जाएगी।

१० जनवरी, २०१६ को प्रात ९ बजे आचार्य विजय रत्नसुंदरसूरीश्वरजी द्वारा लिखित ३०० वीं पुस्तक 'मारूं भारत, सारूं भारत' का लोकार्पण होने वाला है। यह पुस्तक हिंदी, गुजराती, मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में है। साहित्यसृजन के इतिहास का है यह सुवर्ण पृष्ठ है। इस समारोह में लाखों की तादाद में भक्तगण उपस्थित रहने वाले है।

मैदान ने क्यों कोई झंडे नहीं गाड़े समझ नहीं आया जबकि यह बेहतरीन फिल्म है

  कल  मैने प्राइम विडियो पर प्रसारित निर्देशक अमित रविंद्रनाथ शर्मा और अभिनेता अजय देवगन की फिल्म "मैदान" देखी। अजय देवगन की यह फि...