Tuesday, September 15, 2020

बस कंडक्टर से कैसे बने हास्य कलाकार -- जॉनी वॉकर


"सर जो तेरा चकराये या दिल डूबा जाये " यह लोकप्रिय गीत तो आप सभी सुना होगा और गुनगुनाया भी होगा।  फिल्म "प्यासा "  के इस गीत को परदे पर हास्य अभिनेता जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया था।  ११ नवम्बर १९२६ को जन्मे जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी था। जॉनी वॉकर नाम तो उन्हें अभिनेता गुरुदत्त ने दिया था। आइये जानते हैं एक बस कंडक्टर से लोकप्रिय हास्य अभिनेता कैसे बने  बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी। 

३०० के करीब हिंदी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ने वाले जॉनी वॉकर का जन्म इंदौर में हुआ था। वहां उनके पिता एक मिल में काम करते करते थे। रोजी -  रोटी की तलाश में उनका परिवार बॉम्बे चला आया। बॉम्बे में बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी ने अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए कभी फल बेचे कभी सब्जी तो कभी उन्होंने आइस क्रीम भी बेची और फिर बाद में उनकी नौकरी एक बस कंडक्टर के रूप में लग गयी। हालाँकि वो नौकरी करते थे लेकिन उनका सपना था फिल्मों में हास्य कलाकार बनने का। बदरुद्दीन नूर मोहम्मद चार्ली के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उनके द्वारा परदे पर अभिनीत अदाकारी को अपने जीवन में करके लोगों को हँसाया करते थे। यहां तक वो अपनी मिमिक्री से बस के यात्रियों का मनोरंजन भी किया करते थे। ऐसी ही किसी बस में लोकप्रिय अभिनेता बलराज साहनी ने बदरुद्दीन को देखा और अभिनेता गुरुदत्त से मिलवाया।

अभिनेता बलराज साहनी उन दिनों फिल्म "बाज़ी " लिख रहे थे। उन्होंने बदरुद्दीन को गुरुदत्त के ऑफिस में बुलाया जहाँ गुरुदत्त चेतन आनंद के साथ किसी बात पर चर्चा कर रहे थे, तभी कहीं से बदरुद्दीन आ गये शराबी बन कर  उन दोनों के बीच में पँहुच गये और गुरुदत्त को परेशान करने लगे। जब गुरुदत्त कुछ ज्यादा ही परेशान हो गये तब उन्होंने अपने स्टाफ को हिदायत दी कि शराबी बने बदरुद्दीन को ऑफिस से बाहर निकालने की। तभी बलराज साहनी आ गये और जोर -- जोर से हँसने लगे और उन्होंने गुरुदत्त को बदरुद्दीन के बारें में सब बताया। बदरुद्दीन के अभिनय से इतने प्रभावित हुए गुरुदत्त कि उन्होंने अपनी फिल्म "बाज़ी " में उन्हें काम भी दे दिया साथ ही उन्होंने जॉनी वॉकर शराब के एक लोकप्रिय ब्रांड के नाम पर  बदरुद्दीन को नया नाम जॉनी वॉकर भी दिया। बस तभी से बदरुद्दीन हम सबके जॉनी वॉकर बन गये। फिल्म "बाज़ी" के बाद जब भी गुरदत्त ने कोई फिल्म बनाई उन्होंने जॉनी वॉकर को अपनी फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका अवश्य ही दी। गुरुदत्त और जॉनी वॉकर ने एक साथ बाज़ी ,आर पार, मिस्टर ऐंड मिसेज ५५ , सीआईडी, प्यासा, कागज के फूल आदि फिल्मों में काम किया है। 

हास्य अभिनेताओं पर गीत फिल्माने का सिलसिला भी अभिनेता जॉनी वॉकर के समय में ही हुआ।फिल्म 'आर पार' का गाना 'अरे तौबा तौबा' जॉनी वाकर पर फिल्माया गया पहला गाना था। बाद में उन पर सर जो तेरा चकराए , ये है बम्बई मेरी जान, जाने कहां मेरा जिगर गया जी, जंगल में मोर नाचा किसने देखा, गरीब जानके हमको न तुम भुला देना, हम भी अगर बच्चे होते और मैं बम्बई का बाबू जैसे कई सदाबहार गाने उन पर  फिल्माये गये। जॉनी वॉकर  के  गीतों की लोकप्रियता का आलम यह था कि फिल्म निर्माता विशेष रूप से  लिये अपनी फिल्मों में उनके गीतों को रखवाने लगे। जॉनी वॉकर  ही पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने सेकेटरी रखने का चलन शुरू किया।  सबसे पहले जॉनी वॉकर ने ही संडे को शूटिंग नहीं करने का फैसला किया। 

 हास्य भूमिकाओं में जॉनी इस कदर जमे कि उन्हें मुख्य भूमिका में लेकर मिस्टर कार्टून एम.ए. ,जरा बचके, रिक्शावाला, मिस्टर जॉन जैसी फिल्में बनने लगीं। एक फिल्म तो उनके ही नाम 'जॉनी वाकर' भी थी । जॉनी वॉकर ने जब भी किसी किरदार को अभिनीत किया वो दर्शकों के दिलों पर छा गया , जैसे १९७१ में आयी  ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म "आनंद" का किरदार।  ईसा भाई सूरतवाला का किरदार एक ऐसा किरदार है जिसे आज भी दर्शक याद करते हैं और उसका बोला संवाद  "जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह। हम सब रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ में है। कब, कौन, कैसे उठेगा, कोई नहीं बता सकता।' कहते है कि यह किरदार फिल्म में बहुत ही छोटा था और उस समय जॉनी फिल्म के नायक के बराबर की भूमिका करते थे। फिल्म "आनंद "  की इस छोटी भूमिका के लिए ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें बड़ी मुश्किल से तैयार किया। 

सन १९५१ में फिल्म "बाज़ी " से अपना अभिनय सफर शुरू करने वाले  जॉनी वॉकर ने ने १९८८ तक लगातार अपने अभिनय से दर्शकों को हँसाया। लेकिन इसके बाद अश्लील हास्य और द्विअर्थी संवादों की वजह से वो फिल्मों से दूर हो गये लेकिन जब १९९७ में अभिनेता कमल हासन ने उन्हें फिल्म "चाची ४२० " के लिए अप्रोच किया तो वो मना नहीं कर सके। जॉनी वॉकर को उनके हास्य अभिनय के लिये फिल्म "शिकार " के लिए फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला था। इसी तरह फिल्म "मधुमती " के लिए सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला था। 

ऐसा शराबी जिसने कभी शराब नही पी -- केश्टो मुखर्जी

हास्य अभिनेता केश्टो मुखर्जी का नाम आते ही हम सभी की आँखों के आगे के एक ऐसे शराबी का चेहरा सामने आने लगता है जो दारु के नशे में बात करता है और लड़खड़ा कर चलता है और ऐसे संवाद बोलता है जिसे सुनकर देखकर हम हँस - हँस कर लोट पोट हो जाते हैं। केश्टो मुखर्जी ऐसे हास्य कलाकार थे जिन्होंने फिल्मों में सबसे ज्यादा शराबी की भूमिकायें अभिनीत की। जबकि असली जिंदगी में उन्होंने कभी दारु नहीं पी।

केश्टो मुखर्जी का जन्म ७ अगस्त १९०५ को मुंबई यानि उस समय के बॉम्बे में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत बंगाली फिल्मों से की। उन्होंने  लोकप्रिय निर्देशक ऋत्विक घटक की बारी थेके पालिये ,अजंत्रिक , नागरिक और जुक्ति टक्को आर गप्पो आदि फिल्मों में काफी महत्वपूर्ण भूमिकायें अभिनीत की। यूं तो केश्टो ने सन १९५७ में फिल्म "मुसाफिर " हिंदी फिल्मों में अपनी शुरुआत की। लेकिन शराबी की भूमिका जिसके लिए वो लोकप्रिय हुए उन्हें १९७० में रिलीज़ फिल्म " माँ और ममता " में मिली। 

हुआ कुछ यूँ कि निर्देशक असित सेन को एक ऐसे अभिनेता की जरूरत थी जो शराबी का किरदार अभिनीत कर सके और केश्टो मुखर्जी को काम की तलाश थी। हालाँकि इस फिल्म से पहले केश्टो ने मुसाफिर , खजांची , राखी और रायफल , मासूम , परख , आरती, आशिक , प्रेम पत्र , असली नकली ,राहु केतु ,बीवी और मकान , मँझली दीदी ,  अपना घर अपनी कहानी ,पड़ोसन , पिंजरे के पंछी और अनोखी रात आदि फिल्मों में काम किया था। 

निर्देशक असित सेन ने अपनी फिल्म में केश्टो को शराबी की भूमिका दी और केश्टो ने भी उस भूमिका को ऐसे निभाया कि उनका शराबी किरदार  दर्शक क्या फिल्म निर्माता- निर्देशकों को भी बेहद पसंद आया बस फिर क्या था जब भी किसी फिल्म में शराबी की भूमिका हो अभिनेता बस केश्टो ही होते थे। हर फिल्म में शराबी की उनकी भूमिका इतनी सशक्त होती थी कि लोग समझने लगे कि वो पक्के शराबी हैं। जबकि असल में ऐसा बिलकुल भी नहीं था।

कहा जाता है  कि एक फिल्म में केश्टो ने कुत्ते की भी आवाज़ निकाली थी। उन्हें काम की तलाश थी तो वो फिल्म निर्देशकों  से मिलते रहते थे। इसी तरह केश्टो बिमल दा से भी मिले लेकिन केश्टो के योग्य उनके पास कोई किरदार नहीं था। उन्होंने उन्हें मना किया कि अभी उनकी फिल्म में कोई भूमिका नहीं है  लेकिन इसके बावजूद भी केश्टो गये नहीं उनके पास ही खड़े रहे तब बिमल दा को गुस्सा आ गया और उन्होंने उनसे पूछा कि क्या कुत्ते की आवाज़ निकाल सकते हो। केश्टो भी कहाँ पीछे हटने वाले थे उन्होंने कुत्ते की आवाज़ निकाल कर विमल दा को भी अचम्भित कर दिया।

शराबी की भूमिकाओं के अलावा भी कुछ फ़िल्में ऐसी हैं जिनमें केश्टो ने बेहतरीन काम किया। उन्होंने गुलज़ार की फिल्म "मेरे अपने" में अभिनेत्री मीना कुमारी के दूर के रिश्तेदार का किरदार अभिनीत किया था। इसी तरह गुलज़ार की फिल्म "परिचय " में उन्होंने बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर की भूमिका की। जिसे बच्चे डरा कर भगा देते हैं।फिल्म जंजीर , शोले  और आपकी कसम में उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया। तीसरी कसम में केश्टो ने राज कपूर के साथ काम किया। फिल्म "साधु सुर शैतान" के अलावा फिल्म "पड़ोसन " में उन्होंने अभिनेता किशोर कुमार के साथ काम किया। इसी तरह अभिनेता महमूद की फिल्म "बॉम्बे टू गोवा " में एक ऊंघते हुए यात्री का किरदार अभिनीत किया।

यूँ तो केश्टो मुखर्जी ने अनेकों फिल्मों में अभिनय किया है लेकिन जब - जब उनकी फिल्मों का जिक्र होगा तब उनकी फिल्म  "पड़ोसन" , पिया का घर , तीसरी कसम , गुड्डी, चुपके चुपके ,  लोफर , जंजीर ,द बर्निग ट्रेन ,गोलमाल ,खूबसूरत  आदि फिल्मों का नाम जरूर लिया जायेगा।  १५० के करीब फिल्मों में अभिनय करने वाले केश्टो मुखर्जी की मृत्यु २ मार्च १९८२ को हुई। उनकी बेटी सुष्मिता मुखर्जी फिल्मों और टी वी में आज भी काम करती हैं और उनके बेटे  बबलू मुखर्जी क्या करते हैं नहीं पता लेकिन एक समय में उन्होंने अनेकों टी वी धारावाहिकों में काम किया है।  

Friday, March 13, 2020

5 वां भारत आइकन अवॉर्ड










5 वें भारत आइकॉन अवार्ड के इवेंट के लिए जुहू के इस्कॉन में सितारे उमड़ पड़े। भारत आइकन अवार्ड्स के सीएमडी अखिल बंसल ने इस्कॉन ऑडिटोरियम, जुहू में भारत आइकन अवार्ड के पांचवें संस्करण का आयोजन किया, जहाँ उन्होंने बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को सम्मान से नवाजा। यह पुरस्कार रॉयल हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था। इस पुरस्कार के पीछे स्वच्छ भारत अभियान और सेव द गर्ल चाइल्ड को फोकस करना है। अभिनेता विकास गुप्ता, गौरव शर्मा, डिजाइनर रोहित वर्मा, निर्देशक-निर्माता अनिल शर्मा, के सी बोकाडिया, धीरज कुमार, मेहुल कुमार, फ्लोरा सैनी, रिधिमा तिवारी, भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी, प्रदीप पांडे, मंजू लोढ़ा, ब्राइट आउटडोर के योगेश लखानी, अदा खान जैसी कई हस्तियों को समारोह में पुरस्कार मिला। इस अवार्ड नाईट के लिए मिस इंडिया सिमरन आहूजा एंकर थी। भारत आइकॉन अवार्ड कार्यक्रम में सितारों की भीड़ नजर आयी। अखिल बंसल द्वारा आयोजित पांचवें भारत आइकॉन अवार्ड में फिल्म, टीवी जगत, सामाजिक और बिजनेस से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। अखिल बंसल ने हस्तियों को अवार्ड देकर उनका सम्मान बढ़ाया। इस अवॉर्ड फंक्शन में रानी चटर्जी, डायरेक्टर राजकुमार पांडेय और चिंटू पांडेय भी हाज़िर हुए। 

कहानी -- हिंदी फिल्म -- अंग्रेजी मीडियम

कहानी -- हिंदी फिल्म -- अंग्रेजी मीडियम 
रिलीज़ --- १३ मार्च 
बैनर -- मैडॉक फिल्म्स , लंदन कॉलिंग प्रोडक्शन 
निर्माता -- दिनेश विजन , ज्योति देशपाण्डेय
निर्देशक -- होमी अदजानिया  
लेखक -- भावेश मांदलिया , गौरव शुक्ला , विनय छावल , सारा बोडीनर 
कलाकार -- इरफ़ान खान , करीना कपूर खान , राधिका मदान , दीपक डोबरियाल 
संगीत -- सचिन -- जिगर , तनिष्क बागची 
गीत -- तनिष्क बागची , जिगर सरैया , प्रिया सरैया 
आवाज़ --  सचिन -- जिगर, विशाल डडलानी , निकिता गाँधी ,रोमी , तनिष्का संघवी 

लेखक --निर्देशक  होमी अदजानिया  ने पहली फिल्म निर्देशित की थी २००६ में बीइंग सायरस। इसके बाद २०१२ में कॉकटेल और २०१४ में फाइंडिंग फेनी निर्देशित की।  २०१७ में इरफ़ान की दो फ़िल्में आयी हिंदी मीडियम और करीब - करीब सिंगल और २०१८ में आयी फिल्म "कारवाँ " .  फिर इसके बाद उन्हें न्यूरोएंडोक्रिने ट्यूमर जैसी गंभीर बिमारी हो गयी। बिमारी के इलाज़ के बाद उनकी पहली ही फिल्म है "अंग्रेजी मीडियम" ।  करीना की मुख्य फ़िल्में हैं --  मुझे कुछ कहना है , यादें , अजनबी , अशोका ,कभी ख़ुशी कभी ग़म , चमेली, देव, फ़िदा,मैं प्रेम की दिवानी हूँ ,युवा , ऐतराज़ ,ओमकारा ,जब वी मेट ,गोलमाल रिटर्न्स ,वी आर फैमिली , थ्री इडियट्स ,बॉडीगॉर्ड, बजरंगी भाईजान ,सिंघम रिटर्न्स , की एंड का,  वीरे दी वैडिंग और गुड न्यूज़ आदि ।  राधिका मदान ने टी वी धारावाहिक "मेरी आशिकी तुम से ही " फिल्मों में छलाँग लगायी है।  उनकी पहली फिल्म थी विशाल भारद्वाज की "पटाखा " और दूसरी थी "मर्द को दर्द नहीं होता "  । २०१७ में आयी फिल्म "हिंदी मीडियम " की सीक्वेल फिल्म है "अंग्रेजी मीडियम "। हिंदी मीडियम के निर्देशक थे साकेत चौधरी। 

पिता - पुत्री की भावनात्मक कहानी  है फिल्म "अंग्रेजी मीडियम " की। राजस्थान के एक शहर में तारिका बंसल ( राधिका मदान ) अपने पिता चम्पक बंसल ( इरफ़ान खान ) के साथ रहती है दोनों की अपनी हंसती खेलती छोटी सी दुनियाँ है।  तारिका को ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी , लंदन पढ़ने जाना है क्योंकि उसका सपना है  ऑक्सफ़ोर्ड जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का , लेकिन छोटी सी मिठाई की दूकान चलाने वाले चम्पक के पास इतना रुपया पैसा नहीं है कि वो अपनी बेटी को पढ़ाई करने के लिए लंदन भेज सकें लेकिन फिर भी वो अपनी दूकान बेच कर जैसे तैसे रूपये इकठ्ठा कर  बेटी को  लंदन भेजते हैं।  

तारिका को लंदन भेजने में चम्पक को किन किन रास्तों से गुज़रना पड़ता है ? यही इस फिल्म में दिखाया गया है। 

Wednesday, March 11, 2020

गणेश आचार्या ने निर्देशक मनोज शर्मा की फिल्म "खली बली " के टाइटल ट्रैक को कोरियोग्राफ करने के साथ उसमें ऐक्ट भी किया


बॉलीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्या ने निर्देशक मनोज शर्मा की अपकमिंग हॉरर कॉमेडी फिल्म "खली बली " का टाइटल ट्रैक शूट किया। मुंबई के एंजेल स्टूडियो में इस स्पेशल गाने को कायनात अरोड़ा और गणेश आचार्या पर फिल्माया गया। जी हां, इस गाने में खुद गणेश आचार्या भी डांस करते नजर आएंगे। फिल्म के निर्माता कमल किशोर मिश्रा हैं। फिल्म खली बली को वन एंटरटेनमेंट फिल्म प्रोडक्शंस और प्राची मूवीज के बैनर तले निर्मित किया जा रहा है। इस फ़िल्म के कलाकारों में धर्मेंद्र, मधु , रजनीश दुग्गल , कायनात अरोरा ,रोहन मेहरा ,विजय राज ,राजपाल यादव ,हेमंत पांडे , बृजेन्द्र काला, यासमीन ख़ान ,असरानी और एकता जैन शामिल हैं। इस फिल्म से मधु लंबे अरसे बाद कम बैक कर रही हैं।
कोरियोग्राफर गणेश आचार्या ने यहां मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैंने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के लिए खली बली गीत कोरियोग्राफ किया था, जिसपर रणवीर सिंह ने गजब का डांस किया था। अब निर्देशक मनोज शर्मा की अपकमिंग फिल्म खली बल्ली का टाइटल ट्रैक मैंने कोरियोग्राफ किया है, जिसमे मैं डांस करते भी नजर आऊंगा। कायनात अरोड़ा ने इस गीत में बहुत अच्छा डांस किया है। फिल्म के निर्माता कमल किशोर मिश्रा ने इस गाने को बहुत बड़ा बनाने के लिए बजट से कोई समझौता नहीं किया है। गाने में काफी डांसर्स हैं और यह युथ को अट्रैक्ट करेगा। निर्देशक मनोज शर्मा से मेरे वर्षों के रिश्ते रहे हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त और बेहतर इंसान हैं।"
फिल्म के निर्माता कमल किशोर मिश्रा ने यहां कहा कि मेरा सपना था कि मेरी फिल्म का एक गीत गणेश आचार्या जी कोरियोग्राफ करें और मेरा यह ड्रीम उन्होंने पूरा किया। मैं उनका शुक्रगुजार हूं।"
निर्देशक मनोज शर्मा ने बताया कि इस गाने को फिल्माने के साथ हमारी फिल्म की शूटिंग कंप्लीट हो गई है। फिल्म को जून जुलाई में रिलीज़ किया जाएगा। यह स्त्री जैसी एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है। गणेश आचार्या जी से मेरे बहुत पुराने सम्बन्ध रहे हैं। मैंने जब उनसे इस गाने की गुजारिश की तो वह इसे कोरियोग्राफ करने और इस गाने में एक्ट करने के लिए तैयार हो गए। मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं।"
कायनात अरोड़ा ने कहा कि इस फिल्म का हिस्सा बनकर बहुत खुश और उत्साहित फील कर रही हूँ क्योंकि यह हॉरर कॉमेडी है. इसे आप सिचुएशनल कॉमेडी भी कह सकते हैं. इसमें धर्मेन्द्र और मधु जैसे फनकारों के साथ मुझे काम करने का मौका मिला है। गणेश मास्टर जी के साथ वर्किंग एकस्पिरियनस मेरे लिए यादगार रहा। फिल्म के डायरेक्टर मनोज शर्मा के साथ काम का अनुभव भी बहुत अच्छा रहा। स्त्री जैसी फिल्मो की सफलता ने साबित कर दिया है कि दर्शक हॉरर कॉमेडी जौनर की फिल्मों को भी पसंद करने लगे हैं।"

Sunday, March 8, 2020

महिला दिवस का उत्सव... हर रोज!








कुछ दिन पहले प्रशंसक रोमांचित हो गए थे, जब अंग्रेजी मीडियम डायरेक्टर होमी अडजानिया ने बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों के साथ एक प्रोमो वीडियो जारी किया था, जिसमें बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियां लोकप्रिय होते जा रहे गाने कुड़ी नू नाचने दे को गाते दिखीं थीं। चूंकि गाना वायरल हो गया है और लगता है कि हर लड़की का ऐन्थम बन गया है, हमने कुछकुड़ी ट्राइब से पूछा कि यह गाना उनके लिए इतना खास क्यों है।

आलिया भट्ट कहती हैं, "कुड़ी नू नाचने दे  एक लड़की को एक लड़की होने और उसे हासिल करने देने के बारे में बात करता है और एक बार जब वह ऐसा करती है तो वह कमाल करेगी और दुनिया भर में छा जाएगी।"

"यह बहुत दुख की बात है कि अब भी भारत में इतने सारे घरों में, लोग लड़की सिर्फ स्वतंत्र होने और उसे खुद पर विश्वास नहीं करने देते हैं। मुझे उम्मीद है कि हर लड़की अनुभव कर सकती है जिस तरह से मैंने किया" अनुष्का शर्मा कहती हैं।

कैटरीना कैफ ने शेयर किया, "लड़की को डांस करने का तरीका मत बताना... उसे अपने आपको सच्चा व्यक्त करने दो और दुनिया एक बेहतर जगह होगी।

इस उत्साहित, चमकदार हैप्पी सॉन्ग के वीडियो में आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ, अनुष्का शर्मा, कृति सैनॉन, जान्हवी कपूर, कियारा आडवाणी, अनन्या पांडे और राधिका मदन अपने आप को पेश कर रही हैं-खूबसूरत, नासमझ, मस्ती और पॉजिटिव स्पिरिट से भरी। यह पूरी तरह से अनस्क्रिप्टेड है और लड़कियों ने सचमुच गाना बजाया और नृत्य किया और कैमरे के सामने बेहिचक गाया ।

निर्देशक होमी अडजानिया ने कहा, "महिला दिवस मनाने के लिए सिर्फ एक दिन नहीं होना चाहिए, इसे हर दिन मनाया जाना चाहिए!"

जियो स्टूडियोज और प्रेम विजन 13 मार्च, 2020 को रीलीज़ होने वाली होमी अडजानिया द्वारा निर्देशित मैडॉक फिल्म्स प्रोडक्शन दिनेश विजन की अंग्रेजी मीडियम को पेश कर रहे हैं

Thursday, March 5, 2020

कहानी --- हिंदी फिल्म -- बाग़ी - ३

कहानी --- हिंदी फिल्म -- बाग़ी  - ३ 
रिलीज़ --- ६ मार्च 
बैनर -- फॉक्स स्टार स्टूडियोज़ , नडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेन्ट 
निर्माता --  फॉक्स स्टार स्टूडियोज़ , नडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेन्ट  
निर्देशक -- अहमद खान 
संवाद  -- फरहाद सामजी 
पटकथा -- फरहाद सामजी, स्पर्श खेत्रपाल, ताशा भंबरा , मधुर शर्मा   
कहानी -- साजिद नडियाडवाला 
कलाकार -- रितेश देशमुख , टाइगर श्रॉफ , श्रद्धा कपूर 
संगीत -- बप्पी लाहिरी , विशाल शेखर , तनिष्क बागची, सचेत - परम्परा , रोचक कोहली , प्रणय रिजिए 
बैक ग्राउण्ड स्कोर --   जूलियस पैकियम 
गीत -- तनिष्क बागची,प्राची जलौनवी, शब्बीर अहमद 
आवाज़ --  विशाल डडलानी , शेखर रवजियाणी, शान , बप्पी लाहिरी , तुलसी कुमार ,देव नेगी , के के , जोनिता गाँधी , निकिता गाँधी  

यह फिल्म "बाग़ी ३ " बाग़ी सीरीज़ की तीसरी फिल्म है।  पहली फिल्म "बाग़ी" आयी थी २०१६ में।  यह पहली फिल्म २०११ में आयी इंडोनेशियाई  फिल्म "द रैड : रिडेम्पशन" और २०१४ में आयी तेलुगु फिल्म "वर्षम " पर आधारित थी।  दूसरी फिल्म "बाग़ी"   तेलुगु फिल्म "काशनम " पर आधारित है जबकि यह तीसरी फिल्म "बाग़ी - ३ " २०१२  में आयी तमिल फिल्म " वेट्टई " की रीमेक है। पहली और तीसरी फिल्म बागी में श्रद्धा कपूर नायिका हैं जबकि दूसरी फिल्म में दिशा पाटनी नायिका थी। टाइगर श्रॉफ तीनों ही फिल्मों में नायक हैं। पहली फिल्म "बाग़ी " के निर्देशक थे सब्बीर खान थे जबकि बाकी दोनो ही फ़िल्में अहमद खान ने निर्देशित की हैं। अभिनेता , लेखक , निर्माता , निर्देशक हुए लोकप्रिय कोरियोग्राफर अहमद खान ने अनेकों फिल्मों में कोरियोग्राफी की है और कई टी वी शो में जज के रूप में काम किया है।  २००३ में फिल्म "तुझे मेरी कसम " से फिल्मों में शुरुआत करने वाले रितेश देशमुख ने अनेकों फिल्मों में अभिनय किया है।  उनकी कुछ फ़िल्में इस प्रकार हैं -- मस्ती सीरीज़ की सभी फ़िल्में  , बरदाश्त , क्या कूल हैं हम ,ब्लफ मास्टर , मालामाल वीकली , हे बेबी , धमाल सीरीज़ की सभी फ़िल्में , हॉउसफुल सीरीज़ की सभी फ़िल्में , एक विलेन , मरजावां और हॉउस फुल -४ आदि। रितेश ने  "बालक पालक" मराठी फिल्म का निर्माण किया है जबकि मराठी फिल्म "लय भारी" में अभिनय भी किया है। टाइगर श्रॉफ ने फिल्म "हीरोपंथी " से अपनी शुरुआत की। इसके बाद  बागी , ए फ्लाइंग जट्ट ,मुन्ना माइकल,बागी - २  और वॉर आदि फिल्मों में अभिनय किया है। श्रद्धा ने आशिकी - २ , एक विलेन ,ए  बी सी -२ , हॉफ गर्ल फ्रेंड, रॉक ऑन - २ ,बाग़ी , स्त्री , बत्ती गुल मीटर चालू, साहो , छिछोरे एयर स्ट्रीट डाँसर आदि फिल्मों मेंअभिन्य किया है। इस फिल्म ३ लोकप्रिय गीत हैं जिन्हें रीक्रिएट किया गया है।  एक अंगेजी गीत "डू यू लव मी " है।  हिंदी गीत "एक आँख मारूँ "( तोहफा -- १९८४ ) दूसरा गीत दस बहाने ( दस --२००५ ) है 
इस फिल्म की कहानी दो भाईयों के इर्द गिर्द ही घूमती है रॉनी यानि रनवीर प्रताप सिंह ( टाइगर श्रॉफ ) और विक्रम प्रताप सिंह ( रितेश देशमुख ) दो भाई हैं दोनों ही भाई एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं। एक भाई को जब जरूरत होती है तो दूसरा उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है। दोनों भाइयों के बीच गज़ब की बॉन्डिंग है।  बचपन से ही विक्रम को जब भी कुछ भी तकलीफ  होती है तो वो रॉनी को आवाज़ देता है और रॉनी भी  विक्रम की मदद को जैसे तैसे करके पंहुच ही जाता है।  रॉनी की भी यही कोशिश रहती है कि विक्रम किसी  भी  मुसीबत में न फँसे। एक बार  विक्रम को किसी काम से सीरिया जाना पड़ता है और वहाँ उसका अपहरण हो जाता है। ऐसे में रॉनी विक्रम को बचाने सीरिया जाता है। 

क्या रॉनी विक्रम को बचा पाता है ? विक्रम को बचाने में रॉनी को किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ? यही इस फिल्म में दिखाया गया है। 

   

मैदान ने क्यों कोई झंडे नहीं गाड़े समझ नहीं आया जबकि यह बेहतरीन फिल्म है

  कल  मैने प्राइम विडियो पर प्रसारित निर्देशक अमित रविंद्रनाथ शर्मा और अभिनेता अजय देवगन की फिल्म "मैदान" देखी। अजय देवगन की यह फि...