Monday, August 20, 2018

स्त्री फिल्म अलग तरह की हॉरर कॉमेडी फिल्म है - राजकुमार राव

 राजकुमार राव  इन दिनों अपनी रिलीज़ के लिए तैयार फिल्म 'स्त्रीके प्रमोशन में जुटे हैं। हॉरर कॉमिडी 'स्त्रीमें राजकुमार के साथ श्रद्धा कपूर मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म 31 अगस्त को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इस फिल्म के निर्देशक अमर कौशिक हैं  और फिल्म के निर्माता दिनेश विजन हैं। 

स्त्री फिल्म की शूटिंग चंदेरी में हुयी है ? 
चंदेरी बहुत प्यारा सा छोटा सा कस्बा है जहां पहले कभी फ़िल्म की शूटिंग नहीं हुई। महाभारत काल से ही इस जगह का ऐतिहासिक महत्व भी है। फिल्म में हर चीज़ एक नये परिवेश सी दिखेगी। वहां कई पुराने क़िले भी हैं और साथ ही वहां की गलियां अलग सी हैं तो फ़िल्म में वहां के माहौल के हिसाब से नयापन मिलेगा। मैं जब वहां गया तो अपने किरदार की तैयारी के लिए वहां के लोकल लोगों से भी मिला और उनसे बात की। चंदेरी ने जो प्यार दिया है उसकी वजह से वहां के लोगों से हमेशा हमेशा के लिए लगाव हो गया है। फ़िल्म में आपको चंदेरी के लोकल लोग भी देखने को मिलेंगे। 

मुंबई का स्ट्रगल कैसा रहा ?
जब मैं बड़ा हो रहा थातब शाहरुख सर को देखकर काफी हैरान होता थामैं हैरान होता था ये सोचकर कि 
अगर बाहर से आकर कोई अपना इतना बड़ा नाम बना सकता हैतो मेरे लिए भी कोई उम्मीद तो जरूर है
हालांकि ये सब कुछ इतना आसान नहीं थामुंबई आने के बाद मुझे काफी समय तक कोई काम नहीं मिला
यहां-वहां कुछ छोटे-मोटे एड् ही करता रहावो एड शायद अब आपको याद भी नहीं आएंगेकिसी-किसी एड में दिखने वाला मैं दसवां शख्स होता थाहर महीने किसी तरह मैं दस हजार रुपये कमा पाता थाफिर भी कुछ दिन ऐसे होते थेजब मेरे पास पैसे नहीं होते थेतब मैं अपने दोस्तों के साथ उनका खाना शेयर करता थामेरे पास कोई प्लान बी नहीं थामैं लगातार ऑडिशन देता जा रहा थाऑडिशन लेने वाले लोग मुझे छोटे-छोटे रोल दे देते थे मैं उन्हें बड़े रोल के लिए मनाने की कोशिश करता थालेकिन कोई मानता नहीं थाफिर भी मुझे भरोसा था कि कोई  कोई मेरा टैलेंट जरूर परखेगा.'
मुझे आज भी याद है कि किस तरह मैं अतुल मोंगिया से लगातार पूछता रहा थाजब तक कि उन्होंने मुझे लव सेक्स और धोखा के ऑडिशन के लिए नहीं बुला लियामैंने 3-4 टेस्ट दिएएक हफ्ता निकल गयालेकिन कोई जवाब नहीं आया और फिर वो दिन भी आयाजब मेरे अब तक किए हुए स्ट्रगल का नतीजा मुझे मिला.' मैं घर पर अकेला थाजब मुझे मेरी जिंदगी का सबसे अहम 
फोन आयावो शब्द थेहो गया है...यू गॉट  फिल्ममैं अपने घुटनों पर गिर गया...सबसे पहले मम्मी को 
फोन कियाफिल्म रिलीज हुई और मुझे बहुत प्यार मिलालेकिन मेरे लिए और भी ज्यादा खास पल आया जब क्वीन रिलीज हुई.मैं महबूब स्टूडियो में शूटिंग कर रहा थामैंने सुना कि शाहरुख खान सर भी वहीं शूटिंग कर रहे हैं.मुझे लगा मेरे पास मौका हैमैं उनसे मिल सकता हूंमैंने उन्हें एक मैसेज भेजामुझे नहीं लगता था कि वो मुझे जानते हैंलेकिन उन्होंने मुझे बुलाया और वो मेरे बारे में सब कुछ जानते थेउन्होंने मुझे काफी स्पेशल फील करायामैं तो पहले से ही उनका फैन थालेकिन उस दिन मैं उनका और भी बड़ा फैन बन गया.
  
जान्हवी की फिल्म देखी आपने ? 
मैंने जाह्नवी की फिल्म धड़क देखी हैंमुझे फिल्म बहुत पसंद आई। मैं जाह्नवी से एक-दो बार मिला हूंवह बहुत ही स्वीट और टैलंटड लड़की हैं। मैं श्रीदेवीजी का बहुत बड़ा फैन रहा हूं। जाह्नवी से मेरा कनेक्शन भी हैकाफी समय से मैं उनसे मिलता  रहा हूं। धड़क में उनका अभिनय देखकर ऐसा लगता हैउनका बहुत ही ब्राइट फ्यूचर है। मैं इंतजार कर रहा हूं हम दोनों साथ में जल्द ही कुछ काम करेंगे।

स्त्रियों को लेकर आपकी क्या सोच है
देखिए मेरा तो मानना है कि समाज अगर सही मायनों में कोई चला रहा है तो वे स्त्रियां ही चला रहीं हैं। आप हाउस वाइव्स को ही देखिएआसान काम नहीं है उनकापूरा घर चलाना सबकी देखरेख करना और बाकी क्षेत्र की 
लड़कियां भी हम मर्दों से कहीं आगे और बेहतर हैंसभी को मेरा सैल्यूट है  

स्त्री फ़िल्म में श्रद्धा कपूर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ? 
श्रद्धा बिलकुल सही कास्टिंग हैं इस फ़िल्म के लिएपहली बात तो वह बहुत मेहनती हैंफिल्म में वह स्मॉल टाउन वाली लड़की के किरदार में पूरी तरह ढलीं नज़र आएंगी। खास बात ये है कि उन्होंने इस किरदार के लिए काफी नई चीज़ें ट्राई कीं हैं जैसे उनकी आवाज़ और बॉडी 
लैंग्वेज में आपको बहुत नयापन मिलेगा  

मनोज बाजपेयी ने कहा कि उन्होंने जो मेहनत की उसका फल राजकुमार राव जैसे शानदार कलाकारों को मिल रहा हैइस पर क्या कहेंगे।
जी बिल्कुल और ये उनका प्यार है जो वह मेरा ज़िक्र कर रहे हैं इतनी महत्वपूर्ण बात करते हुए। मनोज सर ने जिस वक्त इंडस्ट्री में क़दम रखा और जिस तरह की भूमिकाएं कीं वह एक मिसाल है।शूलसत्या या फिर गैंग्स ऑफ वासेपुर सभी में उनको देखना सीखने जैसा है। वह बहुत प्यार देते हैं मुझेजब भी मिलते हैं तो कहते हैं कि यार तू इंडस्ट्री में सही टाइम पर आया है। मैं जब आया थातब तो बहुत पापड़ बेलने पड़ते थे 

अपारशक्ति खुराना और अभिषेक बनर्जी के साथ भी आप काम कर रहें तो कैसा रहा अनुभव इन नये   कलाकारों के साथ।
 सिर्फ अपारशक्ति या अभिषेक बल्कि पंकज त्रिपाठी जी और विजय राज सर के साथ काम करके भी मज़ा आया। अच्छे एक्टर आपके साथ हों तो काम करने का मज़ा दोगुना हो जाता है। 

आपकी कोई फिल्म जिसकी सीक्वल बनायी जा सके ?
बहुत सी फ़िल्में हैसबसे पहले तो 'न्यूटनही है जिसके मूल आईडिया को लेकर किसी और  विभाग और उसकी व्यवस्था पर बेहतरीन कहानी कही जा सकती हैसाथ ही 'शाहिदफिल्म की दूसरी कड़ी किसी और एक्टिविस्ट की ज़िन्दगी पर बनाई जा सकती है, 'बरेली की बर्फीमें जो मेरा किरदार है प्रीतम विद्रोहीउस किरदार को लेकर दिलचस्प कहानी कही जा सकती है। मैं इस बारे में अपनी राय फिल्मकारों को भी देता रहता हूंउम्मीद कीजिए की भविष्य में ऐसा कुछ हो। 

आने वाली फ़िल्में कौन कौन सी हैं ? 
'स्त्रीके बाद मेरी अगली फ़िल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगाहै जो फरवरी में आये गीअनिल सरजूही चावला और सोनम कपूर हैं मेरे साथ उसमें। उसके बाद कंगना के साथ 'मेंटल है क्या
आयेगीफ़िलहाल मैने एक नई फ़िल्म 'मेड इन चाइनाशुरु की है तो वो भी पाइपलाइन में है। अनुराग बासु की 'इमलीकर रहा हूं जिसमें मेरे साथ एक बार फिर कंगना रनौत नज़र आयेंगी  



Thursday, August 16, 2018

कहानी - हिंदी फिल्म -- गोल्ड

कहानी - हिंदी फिल्म -- गोल्ड 
रिलीज़ -- १५ अगस्त 
बैनर -- एक्सेल एंटरटेनमेन्ट 
निर्माता -- फ़रहान अख़्तर और रितेश सिधवानी 
निर्देशक -- रीमा कागती 
संवाद -- जावेद अख़्तर
कहानी -- रीमा कागती, राजेश देवराज 
पटकथा -- राजेश देवराज 
कलाकार -- अक्षय कुमार, मौनी रॉय, कुणाल कपूर, अमित साध,सनी कौशल, विनीत कुमार सिंह, निकिता दत्ता 
संगीत -- सचिन जिग़र, अर्को पर्वो मुखर्जी, तनिष्क बागची 
गीत -- जावेद अख़्तर,वायु,अर्को  
गायक - गायिका --  यासिर देसाई,विशाल डडलानी, दलेर मेहँदी, सचिन- जिग़र, मोनाली ठाकुर,के के,दिव्या कुमार, सुखविंदर सिंह,फ़रहाद भिवण्डीवाला, शाशा तिरुपति।              

अरमान,वैनटी फेयर,लगान, दिल चाहता है, लक्ष्य , जिंदगी न मिलेगी दोबारा आदि फिल्मों  में  सहायक निर्देशक के रूप में काम चुकी रीमा कागती की  बतौर स्वतंत्र निर्देशक पहली फिल्म थी  २००६ में रिलीज हुई फिल्म " हनीमून ट्रेवल्स प्रा लिमि। इसके बाद २०१६ में आयी फिल्म "तलाश ". फिल्म "गोल्ड " उनकी तीसरी फिल्म है। २०१७ में अक्षय कुमार की फिल्म आयी "टॉयलेट : एक प्रेम कथा , इससे पहले रुस्तम, एयरलिफ़्ट, ओ एम जी, हाउसफुल- २ आदि अनेकों फ़िल्में आयी हैं जिन्हें दर्शकों ने बहुत पसंद किया है। 

फिल्मों में बैक ग्रॉउंड डाँसर के रूप में काम कर चुकी मौनी रॉय इस फिल्म "गोल्ड " में मुख्य अभिनेत्री के तौर में काम कर रही हैं।  मौनी ने २००७ में "क्योंकि सास भी कभी बहू थी " से अपना अभिनय सफर शुरू किया। इसके बाद इन्होने कस्तूरी, दो सहेलियाँ , श्श्श्श कोई है ,देवों के देव महादेव ,नागिन के अलावा अनेकों रियल्टी शो में काम किया है.

अभिनेता कुणाल कपूर ने २००५ में " मीनाक्षी : ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज " से अपने अभिनय की शुरुआत की।  इसके बाद  कुणाल की  रंग दे बसंती ,आजा नच ले, लागा चुनरी में दाग़ , बचना ए हसीनों ,वेलकम टू सज्जनपुर, डॉन - २,लम्हा , लव शव ते चिकन खुराना आदि अनेकों फ़िल्में आयी हैं। 

सच्ची घटनाओं से प्रेरित फिल्म "गोल्ड " की कहानी है  --  जज़्बे की, देश के लिए कुछ कर गुजरने के जूनून की. 
१९४८ -- लंदन ओलंपिक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आयोजित होने वाला पहला ओलंपिक था। इससे पहले १९३६ में बर्लिन में ओलम्पिक हुआ था।  12 साल के अंतराल के बाद आयोजित होने वाले  इस ओलंपिक को लेकर क्या देशवासी , क्या खिलाड़ियों सभी में गज़ब का उत्साह था। क्योंकि आज़ादी के बाद यह पहला ही ओलम्पिक था जिसमें स्वतंत्र भारतीय टीम हिस्सा लेने वाली थी। इससे पहले ब्रिटिश इंडिया के झंडे तले हॉकी में भारतीय टीम विजेता बनी थी। अब देश आज़ाद हो चुका था लेकिन टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी किसी न किसी वजह से हॉकी खेलना छोड़ चुके थे। ऐसे में फिर से उसी उम्दा टीम के उम्दा खिलाड़ियों को एक जुट करने का जिम्मा उठाता है १९३६ के बर्लिन ओलम्पिक में हिस्सा ले चुकी  ब्रिटिश इंडिया की विजेता टीम का मैनेजर और खिलाड़ी तपन दास ( अक्षय कुमार ) . तपन दास के समझाने पर रघुवीर प्रताप सिंह ( अमित साध ) इम्तियाज़ शाह ( विनीत कुमार सिंह ) हिम्मत सिंह ( सनी कौशल ) आदि पुराने खिलाड़ी भी अंग्रेजों से २०० साल की ग़ुलामी का बदला लेने के लिये हॉकी टीम में खेलने के लिए तैयार हो जाते हैं। एक के बाद एक करके ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया,अर्जेंटीना , हॉलैंड,और ब्रिटेन आदि सभी टीमों को पछाड़ती हुई  स्वतंत्र भारत की हॉकी टीम  अपना पहला स्वर्ण पदक जीत कर फहरते हुए तिरँगे के नीचे अपना राष्ट्र गान गाती  हैं। यही इस फिल्म में दिखाया है।    
 

मैदान ने क्यों कोई झंडे नहीं गाड़े समझ नहीं आया जबकि यह बेहतरीन फिल्म है

  कल  मैने प्राइम विडियो पर प्रसारित निर्देशक अमित रविंद्रनाथ शर्मा और अभिनेता अजय देवगन की फिल्म "मैदान" देखी। अजय देवगन की यह फि...