योगेश लखानी जो एक बहुत बड़ा नाम है आउटडोर बिज़नेस में, ब्राईट आउटडोर भारत में होने वाले ज़्यादातर इवेंट्स में आउटडोर पार्टनर होते हैं। इन्हे इस साल जुहू में हुए दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया है।अवार्ड में अनिल कपूर, विवेक ओबेरॉय, रवीना टंडन, शिल्पा शेट्टी, जूही चावला और कई जाने माने कलाकार अवार्ड लेने आये। प्रियंका चोपड़ा का अवार्ड लेने के लिए उनकी माँ मधु चोपड़ा आयीं थी। Tuesday, June 6, 2017
योगेश लखानी को दादा साहेब फाल्के अवार्ड
योगेश लखानी जो एक बहुत बड़ा नाम है आउटडोर बिज़नेस में, ब्राईट आउटडोर भारत में होने वाले ज़्यादातर इवेंट्स में आउटडोर पार्टनर होते हैं। इन्हे इस साल जुहू में हुए दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया है।अवार्ड में अनिल कपूर, विवेक ओबेरॉय, रवीना टंडन, शिल्पा शेट्टी, जूही चावला और कई जाने माने कलाकार अवार्ड लेने आये। प्रियंका चोपड़ा का अवार्ड लेने के लिए उनकी माँ मधु चोपड़ा आयीं थी। Monday, June 5, 2017
अनुज कपूर बने क्रिएटिव आय लिमिटेड का क्रिएटिव और बिज़नेस हेड
सीईएल के बतौर सीएमडी अनुज के शामिल होने के बारे में श्री धीरज कुमार ने कहा, ‘अनुज को अच्छा-खासा क्रिएटिव अनुभव है, साथ ही उनकी व्यावसायिक कौशलता ने क्रिएटिव आई लिमिटेड में एक और पंख जोड़ देगा। क्रिएटिव आई लिमिटेड के सीएफओ / सीओओ श्री सुनील गुप्ता ने बताया कि श्री अनूज कपूर ने टेलीविजन और विज्ञापन सामग्री के बारे में अनुभव है और इसलिए न केवल क्रिएटिव और प्रोडक्शन की बारीकियों को समझता है बल्कि यह भी समझता है कि कैसे एक क्रिएटिव प्रोडक्ट के रूप और सामग्री को संतुलित करना है। हमें मौजूदा संबंधों को मजबूत करने और नए लोगों के साथ संबंध को बनाने में मदद होगी।‘ निष्कर्ष निकालते हुए, श्री धीरज कुमार ने अनूज के साथ जोर दिया और मजबूत रचनात्मकता व वित्तीय टीम निश्चित रूप से कंपनी के लिए नए क्षितिज खोलेंगी।
सीईएल में शामिल होने पर अनूज कपूर ने कहा, ‘सीईएल मीडिया व्यवसाय में सबसे प्रसिद्ध और अनुभवी खिलाड़ियों में से एक है। यह टेलीविजन सामग्री उत्पादन शैली में कुछ सार्वजनिक सीमित कंपनियों में से एक है। श्री धीरज कुमार टेलीविजन व फिल्म दोनों में सबसे वरिष्ठ और सम्मानित नामों में से एक है। मैं अब सीधे कुछ रोमांचक टेलीविजन सामग्री बनाने की उम्मीद कर रहा हूं - फिल्में, डिजिटल और एनीमेशन सामग्री।
Saturday, June 3, 2017
जॉर्जिया का 99 वां स्वतंत्रता दिवस और भारत के साथ 25 साल के राजनितिक संबंधों के जश्न के साथ दोहरा उत्सव
Friday, June 2, 2017
बहुमुखी प्रतिभा के संगीतकार अमित मिश्रा
अमित मिश्रा को उनकी संगीत रचनाओं के लिए बहुत सारे पुरस्कार तो मिल ही चुके हैं और जल्दी ही ‘अतिथि तुम कब जाओगे’, ‘मछली जल की रानी है’ और ‘गेस्ट इन लंदन’ (जो कि १६ जून, २०१७ को रिलीज़ होने के लिए तैयार है) आदि उनकी फ़िल्में आने वाली हैं। हुमा कुरैशी और साक़िब सलीम दोनों की बातें -- कितनी एक सी , कितनी अलग
हुमा कुरैशी और साक़िब सलीम दोनों बहन - भाई हॉरर फिल्म "दोबारा : सी योर इविल" फिल्म में एक साथ आ रहे हैं। असली जिंदगी के बहन भाई फिल्म में भी बहन भाई ही बने हैं। दोनों से बातें हुई अलग - अलग लेकिन दोनों के जवाब कितने एक से रहें और कितने अलग , आइये जानते हैं ----दोबारा फिर कब काम करेगें साथ में ?
साक़िब -- नहीं ,अभी तो नहीं। कर किया अब, जब कभी अच्छा काम मिलेगा तब सोचेंगे।
हुमा --- करेगें जरूर करेगें अगर फिल्म हिट रही तो जरुरु साथ में काम करेगें।
कैसी अभिनेत्री है हुमा ?
साक़िब --बहुत अच्छी अभिनेत्री है। अपनी लाइनें रट कर नहीं आती सेट पर लाइव रहती है हुमा। हमारे घर में वो ही थी जो थियेटर करती थी।
हुमा -- बहुत अच्छा अभिनेता है , बहुत सेंसेटिव है, अच्छा को स्टार है।

सेट पर एक दूसरे की कितनी ग़लतियाँ निकाली हैं आपने ?
साक़िब -- सेट पर हमने गलतियाँ ही निकाली हैं
हुमा -- घर की बहस अब हमने बड़े परदे दिखा दी।
ऐसी कौन सी हॉरर फ़िल्में हैं जिसे देखने में आपको बहुत डर लगा हो ?
साक़िब -- राम गोपाल वर्मा की एक फिल्म थी "रात " उसे देखने में दस साल लगे मुझे , अभी कुछ साल पहले ही पूरी की है।
हुमा -- द कन्जूरिंग , ओक्युलस , ममा इन सभी फिल्मों को देख कर मुझे बहुत डर लगा।
दर्शक कितना डरेगें आपकी फिल्म "दोबारा : सी योर इविल " से
साक़िब -- हम तो चाहते हैं कि दर्शक बहुत डरे , आजकल हमारी हॉरर फिल्मों में एक नया शब्द जुड़ गया हॉरेक्स लेकिन हमारी फिल्म ऐसी नहीं है। पूरी तरह से हॉरर फिल्म बनाने की कोशिश की है।
हुमा --- फॅमिली के साथ देख सकेंगे हमारी फिल्म को , लेकिन डर भी बहुत लगेगा सबको।
भूत प्रेत को आप कितना मानते हैं ?
साक़िब --नहीं मैं नहीं मानता। जब तक मेरे साथ कुछ घटता नहीं है मैं उसमें विश्वास नहीं करता । अच्छी शक्तियाँ और बुरी शक्तियाँ होती हैं यह मैं मानता हूँ.
हुमा -- भगवान को मानती हूँ जिसे मैंने देखा नहीं उसे मैं नहीं मानती।
हुमा की कौन सी फिल्में अच्छी लगती हैं ?
साक़िब -- गैंग्स ऑफ़ वासेपुर , बदलापुर और डेढ़ इश्क़िया।
हुमा -- हवा हवाई , मेरे डैड की मारुति अच्छी फ़िल्में है साक़िब।
रियल लाइफ में कौन जीतता है बहस में ?
साक़िब -- मैं .
हुमा -- मेरा जवाब है मैं ,लेकिन जीतता हमेशा साक़िब ही है।
Thursday, June 1, 2017
ऑल इंडिया अचीवर्स अवॉर्ड

हिंदी फिल्म --- दोबारा : सी योर इविल
बैनर --- इंटरपिड पिक्चर्स , बी फॉर यू , ज़ाहक फिल्म्स लिमिटेड , रिलेटिविटी मीडिया।
रिलीज़ -- २ जून
निर्माता -- प्रवाल रमन, ईशान सक्सेना, विक्रम खाखर और सुनील शाह।
स्क्रीन प्ले और निर्देशन -- प्रवाल रमन
२०१३ में रिलीज़ हुई सुपर नेचुरल फिल्म ओक्युलस पर आधारित।
कलाकार --- हुमा कुरैशी ,साक़िब सलीम , लिजा रे , आदिल हुसैन और रिया चक्रवर्ती।
संगीत -- अरको प्रवो मुखर्जी।
राम गोपाल वर्मा के सहायक रह चुके निर्देशक प्रबाल रमन ने इस फिल्म से पहले डरना मना है (२००३ ) गायब ( २००४ ) डरना ज़रूरी है ( २००६ ) ४०४ (२०११ ) मैं और चार्ल्स ( २०१५ )आदि फिल्मों का निर्देशन किया है। २०१३ में रिलीज़ हुई सुपर नेचुरल फिल्म "ओक्युलस" पर आधारित इस फिल्म "दोबारा : सी योर इविल" में हुमा क़ुरेशी और साक़िब सलीम दोनों सगे बहन भाई फ़िल्म में भी बहन भाई का किरदार अभिनीत कर रहे हैं।
इस फिल्म की कहानी के केंद्र में है एक आईना , जिसके बारें में यह माना जाता है कि वो भूतिया आईना है। फ़िल्म की कहानी दो अलग अलग समय की है. वर्तमान से शुरू होती है और बीच - बीच में ११ साल पहले की घटना को भी दिखाया जाता है। एलेक्स मर्चेंट ( आदिल हुसैन ) और लिज़ा मर्चेंट ( लिज़ा रे ) अपने दोनों बच्चों नताशा मर्चेंट और कबीर मर्चेंट के साथ अपने नये घर में रहने जाते हैं। एलेक्स एक पुराना आईना ख़रीदकर लाता है और बस शुरू हो जाता है अजीबोग़रीब घटनाओं का सिलसिला। कभी एलेक्स को आईने में से निकल कर एक महिला लुभाती है , कभी लिज़ा पागलों की तरह व्यवहार करने लगती है। दोनों बच्चे भी इस आईने की वजह से परेशान हो जाते हैं और तभी कबीर कुछ ऐसा कर बैठता है जिससे उसे जेल हो जाती है। बड़े होने पर कबीर ( साकिब सलीम ) जेल से रिहा होता है और बहुत सालों के बाद कबीर और नताशा ( हुमा कुरेशी ) दोनों भाई - बहन फिर से एक दूसरे से मिलते हैं और आईने की उलझी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश करते हैं कि क्या सच आईने में भूत है या उनके मन का वहम ? दोनों भाई - बहन अपने माता पिता को मारने वाले उस आईने को तोड़ने की कोशिश करते हैं जिसकी वजह से उनकी हंसती खेलती दुनिया उजड़ गयी।
क्या कबीर और नताशा उस मनहूस आईने को तोड़ पाते हैं ? क्या दोनों आईने के चँगुल में फँस जाते हैं ? जानने के लिए देखिये फिल्म " दोबारा : सी योर इविल "
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